चंडीगढ़ की विरासत से समझौते पर सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने जताई चिंता, मास्टर प्लान सख्ती से लागू करने की मांग
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन (एसआईए) ने चंडीगढ़ के मास्टर प्लान और शहर की विरासत से किसी भी प्रकार के समझौते पर गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि विकास के नाम पर यदि शहर के मूल स्वरूप और नियोजित चरित्र को कमजोर किया गया तो चंडीगढ़ अपनी विशिष्ट पहचान खो देगा, जिसकी भरपाई भविष्य में संभव नहीं होगी।
एसआईए के अध्यक्ष आर. के. गर्ग ने जारी बयान में कहा कि चंडीगढ़ आज अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। एक ओर यह शहर विश्व के सर्वश्रेष्ठ नियोजित शहरों में गिना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसकी विरासत को ही विकास में बाधा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि ले कॉर्बुज़िए और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई मूल योजना केवल एक शहर की रूपरेखा नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर शहरी नियोजन का एक आदर्श मॉडल है। इस विरासत की रक्षा करना केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
गर्ग ने कहा कि विकास और विरासत संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। यदि प्रशासन शहर के विकास और उसके मूल स्वरूप के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस कर रहा है तो समाधान मास्टर प्लान को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसका प्रभावी और सख्त क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार चंडीगढ़ के मूल स्वरूप और नियोजित चरित्र को सुरक्षित नहीं रख सकती, तो फिर अधिसूचित मास्टर प्लान और शहर की विरासत की बलि क्यों दी जाए।
उनका कहना था कि एक बार चंडीगढ़ की विशिष्ट पहचान नष्ट हो गई तो उसे दोबारा वापस नहीं लाया जा सकेगा और आने वाली पीढ़ियां जरूर पूछेंगी कि जब मास्टर प्लान मौजूद था, तब इस विश्वप्रसिद्ध नियोजित शहर को अव्यवस्थित विकास की ओर क्यों जाने दिया गया। एसआईए ने प्रशासन और नागरिकों से अपील की कि वे चंडीगढ़ की विरासत और नियोजित स्वरूप को बचाने के लिए समय रहते गंभीरता से कदम उठाएं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

