संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिवसेना (शिंदे) में विलय को मंजूरी दे दी है। साथ ही शिवसेना की ताकत 13 सांसदों की हो गई है।
लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी आफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले 20 सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को भी मंजूरी दे दी है।
अपनी पार्टी से अलग बैठेंगे टीएमसी से बागी सांसद
तृणमूल से बगावत करने वाले 20 सांसद अपनी मूल पार्टी से अलग बैठेंगे। बागी तृणमूल सांसदों की एनसीपीआई के हिस्से के तौर पर मान्यता दिए जाने की मांग पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यह मामला अभी विचाराधीन है।
तृणमूल और शिवसेना (यूबीटी) ने विद्रोही सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। विद्रोही तृणमूल सांसदों के रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में शामिल होने की भी संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ने इससे पहले तृणमूल के नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और पार्टी के अलग हुए गुट से मुलाकात की थी।
उद्धव गुट के शिवसेना का कैसा हाल?
शिवसेना (यूबीटी) के मामले में भी ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई गई थी। सूत्रों के मुताबिक, संसद के कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा किया गया और उन्होंने स्पीकर को निर्णय लेने के लिए अपनी राय दी।
सूत्रों ने बताया कि फैसले लेने से पहले इसी तरह की स्थितियों में लोकसभा के पूर्व अध्यक्षों और राज्यसभा के पूर्व सभापतियों द्वारा लिए गए निर्णयों का भी अध्ययन किया गया। साथ ही संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर भी गौर किया गया।
कांग्रेस द्वारा द्रमुक के साथ दशकों पुराना गठबंधन तोड़कर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की टीवीके से हाथ मिलाने के बाद द्रविड़ पार्टी ने भी अपने पूर्व सहयोगी से अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस मांग को भी स्वीकार किए जाने की संभावना है।
उद्धव ने नागपुर के राममंदिर में किया राम रक्षा स्तोत्र का पाठ
दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ़ नागपुर के राम नगर स्थित ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर पहुंचकर शनिवार को उद्धव ठाकरे ने राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
पूजा-अर्चना और महाआरती के बाद मंदिर परिसर के बाहर जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भाजपा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संघ प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला बोला।
ठाकरे ने अपने संबोधन में भाजपा के हिंदुत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित घोटालों और चंदे की हेराफेरी के आरोपों का जिक्र करते हुए भाजपा को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि शिवसेना ने राज्य में ‘रामरक्षा’ (राम की सुरक्षा) मुहिम इसलिए शुरू की है ताकि हिंदुओं को अंधभक्ति से जगाया जा सके। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज प्रभु श्रीराम के नाम पर राजनीति करने वाले खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार समझते हैं, लेकिन असल में वे केवल सत्ता के भूखे हैं। संजय राउत ने इस कार्यक्रम के लिए आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी विशेष निमंत्रण भेजा था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

