देश की सबसे बड़ी जल सुरंग तैयार, 12 किमी की टनल से बुझेगी छह जिलों के खेतों की प्यास

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देश की सबसे बड़ी जल सुरंग मध्य प्रदेश में तैयार हो गई है। महाकोशल अंचल के जबलपुर जिले से विंध्य अंचल तक नर्मदा के जल को खेतों में पहुंचाने के लिए कटनी जिले के स्लीमनाबाद में इसे तैयार किया गया है।

नर्मदा की अमृतधारा को बिना पंप की सहायता से प्राकृतिक बहाव के साथ सोन बेसिन से जोड़ने के लिए यह सेतु का कार्य करेगी। 12 किमी लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली इस सुरंग से महाकोशल-विंध्य के छह जिलों की दो लाख 45 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के दाएं तट पर मुख्य नहर की इस टनल का कार्य करीब 15 साल चला। स्थानीय लोग बताते हैं कि परियोजना शुरू होने के समय पैदा हुए बच्चे बड़े हो गए। सुरंग के प्रवेश द्वार पर पहली शिफ्ट में काम करने वाले मजदूर बुजुर्ग हो गए।

कुछ सहकर्मी इस सफलता को देखने के लिए जीवित नहीं रहे। मशीनें बदल गईं, ठेकेदार बदल गए, अधिकारी बदल गए पर पहाड़ के नीचे काम चलता रहा। अमेरिका और जर्मनी की मशीनों से पहाड़ का सीना चीरने में कई बाधाएं भी आईं।

कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव के मुताबिक, सलैया फाटक से लेकर खिरहनी गांव तक पहाड़ों के नीचे बनी सुरंग देश की सबसे बड़ी जल सुरंग है। टनल का काम पूरा होने के साथ ही साफ्ट तक मशीन पहुंच गई है और अब उसको बाहर निकालने का कार्य शुरू किया जा रहा है।

अनेक बाधाओं के बाद मिली सफलता

परियोजना को 799 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2008 में स्वीकृति प्रदान की गई थी। स्लीमनाबाद में इस अंडरग्राउंड टनल का कार्य 2011 में प्रारंभ होकर 40 माह में पूरा होना था। लगातार बाधाओं के कारण काम लेट होता गया।

मशीनों के कटर टूटने, पानी का बहाव अधिक होने, मिट्टी के धंसने के साथ सलैया फाटक के पास रेलवे लाइन के नीचे से टनल निकालने में स्वीकृति मिलने में छह-छह माह का समय लगा और इस दौरान काम बंद रखना पड़ा।

2022 में मशीन का कटर सुधारने के लिए उसे बाहर निकालने के दौरान बनाए गए सॉफ्ट के धंसने से नौ मजदूर भी उसमें दब गए थे और दो की मौत हो गई थी। देरी के साथ ही योजना की लागत बढ़कर 1600 करोड़ रुपये पहुंच गई।

कटनी का 21 हजार 823 हेक्टेयर, मैहर का 54 हजार 227 हेक्टेयर, सतना का एक लाख चार हजार 970 हेक्टेयर, पन्ना का 448 हेक्टेयर और रीवा का तीन हजार 84 हेक्टेयर क्षेत्र सीधे लाभान्वित होगा।

जबलपुर जिले की भी लगभग 60 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। छह जिलों के 1450 गांवों को इससे लाभ मिलेगा। अक्टूबर माह से नर्मदा का जल विंध्य तक पहुंचाने की योजना है।

आज मुख्यमंत्री करेंगे निरीक्षण बड़ी योजना पूरी होने से उत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शुक्रवार को टनल का निरीक्षण करने पहुंचेंगे। वह पड़वार रोड भी पहुंचेंगे, जहां पर टनल का काम पूरा करने के बाद मशीन को साफ्ट के माध्यम से बाहर निकालने का कार्य होना है। स्लीमनाबाद तिराहा में सभा स्थल पहुंचकर लोगों को संबोधित करेंगे।

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