भागलपुर के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में तीन साल पुराने एक जानलेवा हमले के मामले में पटना उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने पर कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम प्रथम) सह एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अंचल द्विवेदी ने पुलिस की इस घोर लापरवाही पर सीनियर एसपी (एसएसपी) को शोकॉज जारी किया है।
18 जुलाई को मांगी रिपोर्ट
न्यायालय ने एसएसपी को आगामी 18 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर केस डायरी और इंजरी रिपोर्ट समर्पित नहीं करने पर स्पष्टीकरण देने का सख्त आदेश दिया है। मामला सुल्तानगंज थाना कांड संख्या 160/23 से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने वारदात के तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो केस डायरी का एक पन्ना अदालत में जमा किया और न ही जख्मी की इंजरी रिपोर्ट दी।
हाई कोर्ट ने भेजा रिमाइंडर
इस बीच, केस के नामजद आरोपितों ने निचली अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद राहत पाने के लिए पटना उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल कर दी थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई से पहले निचली अदालत से केस डायरी और इंजरी रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन सुल्तानगंज पुलिस की लापरवाही के कारण तय तारीख पर रिपोर्ट पटना नहीं भेजी जा सकी।
एसएसपी को लिखा था पत्र
रिपोर्ट न पहुंचने पर पटना हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए निचली अदालत को एक्सप्रेस रिमाइंडर भेजा, जिसके बाद एसीजेएम कोर्ट ने एसएसपी को पत्र लिखकर तुरंत दोनों रिपोर्ट मांगी थी। अदालत द्वारा बार-बार पत्राचार करने और एएसपी को भी निर्देश देने के बावजूद सुल्तानगंज पुलिस ने रिपोर्ट दबाकर रखी, जिससे उच्च न्यायालय के आदेश की लगातार अवहेलना होती रही।
दीवार प्लास्टर का था विवाद
नतीजतन, न्यायालय ने 10 जुलाई को कड़ा संज्ञान लेते हुए सीधे जिले के कप्तान (एसएसपी) को कारण बताओ नोटिस जारी कर 18 जुलाई को सशरीर हाजिर होने का फरमान सुना दिया। मालूम हो कि शिवनंदनपुर निवासी सुनील बिंद ने अपने बुजुर्ग पिता सोहन बिंद पर जानलेवा हमले के आरोप में बबलू बिंद, संजू देवी, खुशबू कुमारी और पुष्पा देवी पर केस दर्ज कराया था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

