देवघर श्रावणी मेला: बाबा धाम के पट खुलने-बंद होने का समय हो निश्चित, पुरोहितों ने उठाई मांग

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श्रावणी मेला के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन और पंडा धर्मरक्षिणी सभा, तीर्थपुरोहित के बीच समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मेला की सफलता पर विचार विमर्श किया गया। सभी ने एक स्वर में कहा कि बाबा मंदिर के पट खुलने और बंद होने का समय निश्चित होना चाहिए।

पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यात्रियों और तीर्थ पुरोहितों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन को उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर का पट रात आठ बजे बंद किया जाए और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की जाए। यजमान तीर्थ पुरोहितों के घर तक पहुंचने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

महामंत्री निर्मल झा मंटू ने कहा कि हर बार केवल बातें होती हैं, लेकिन कार्य धरातल पर नहीं आते। सावन का महीना अच्छे से गुजरेगा, लेकिन रोजाना की समस्याओं का समाधान नहीं होता।

सफल संचालन के लिए तीन चीजें आवश्यक हैं: आपसी समन्वय, परंपरा, और बेहतर सुविधाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को अच्छी सुविधाएं मुहैया कराने पर विचार होना चाहिए।

उमा मंडप किराए पर लिया गया है, लेकिन प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने प्रोटोकाल व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इसमें अवैध घुसपैठ होती है। सीसीटीवी की मदद से इस पर नजर रखी जा सकती है।

सभा के पदाधिकारी चंद्रशेखर खवाड़े ने प्रोटोकॉल व्यवस्था में परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया। अरुणानंद झा ने कहा कि बाबा मंदिर के पट खुलने और बंद होने का समय निश्चित होना चाहिए। पूर्व महामंत्री कार्तिकनाथ ठाकुर ने कहा कि पहले जलार्पण का समय आठ बजे तक होता था, इसे पुनः बहाल किया जाना चाहिए।

गर्भ गृह में अनावश्यक लोगों की उपस्थिति को समाप्त करने की आवश्यकता है। मंदिर में पूजन सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए, क्योंकि खराब सामग्री के कारण शिवलिंग का क्षरण हो रहा है। पूर्व अध्यक्ष विनोद दत्त द्वारी ने कहा कि दूसरी और तीसरी सोमवारी को प्रशासन को अधिक सजग रहना होगा।

तीर्थपुरोहित दुलर्भ मिश्र ने बताया कि दूसरे और तीसरे सोमवारी को दो लाख से अधिक लोगों की भीड़ जुटने की संभावना है, जो प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है। पूजा में विलंब पर यात्रियों का आक्रोश बढ़ता है, जिससे पंडा और प्रशासन दोनों पर दबाव बढ़ता है।

एम्स के साथ हो गया समन्वय: डीडीसी

डीडीसी पीयूष सिन्हा ने कहा कि एम्स के साथ समन्वय हो गया है, जिससे लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कांवरियों के लिए रुटलाइन की तैयारी कर ली गई है। मंदिर प्रांगण में प्लास्टिक के प्रयोग को न्यूनतम करने की आवश्यकता है, ताकि सफाई बेहतर हो सके।

परंपरा और श्रद्धा के बीच समन्वय की कोशिश: एसपी

पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने कहा कि देवघर में काम करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने परंपरा और श्रद्धा के समन्वय की कोशिश करने का आश्वासन दिया। शिवगंगा के आसपास वाच टावर का निर्माण किया जाएगा, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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