परिषदीय विद्यालयों में अब बिजली कटौती बच्चों की पढ़ाई पर ब्रेक नहीं लगाएगी। डिजिटल शिक्षा को नई गति देने के लिए शासन ने जिले के 494 विद्यालयों में संचालित स्मार्ट कक्षाओं को पावर बैकअप से लैस करने का फैसला किया है। इसके लिए तीन करोड़ 19 लाख 28 हजार रुपये की धनराशि जारी की गई है।
इस पहल के बाद बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भी स्मार्ट क्लास की पढ़ाई निर्बाध जारी रहेगी और बच्चों की सीखने की रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परिषदीय विद्यालयों में आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर होने वाली बिजली कटौती इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने बड़ी चुनौती बन रही थी।
डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य रह जाता था अधूरा
कई विद्यालयों में बिजली न रहने के कारण स्मार्ट कक्षाएं बंद हो जाती थीं और डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए शासन ने व्यापक स्तर पर पावर बैकअप की व्यवस्था सुनिश्चित की है। योजना के तहत जिले के 357 विद्यालयों को इन्वर्टर, दो बैटरियां और स्टेब्लाइजर की खरीद के लिए 38 हजार रुपये प्रति विद्यालय उपलब्ध कराए गए हैं।
वहीं, 137 विद्यालयों को उच्च क्षमता वाली बैकअप व्यवस्था स्थापित करने के लिए एक लाख 33 हजार रुपये प्रति विद्यालय का बजट स्वीकृत किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह का कहना है कि इस व्यवस्था से अब स्मार्ट कक्षाओं का संचालन मौसम या बिजली आपूर्ति पर निर्भर नहीं रहेगा।
बिजली जाने के बाद भी स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर और अन्य डिजिटल उपकरण चलते रहेंगे, जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। अब गांवों के विद्यालयों में भी शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक की रोशनी में बच्चों के भविष्य को नई उड़ान मिलेगी।


