गढ़वा में मेराल सीएचसी पर सिविल सर्जन का बड़ा चाबुक, एक माह से गायब तीन डॉक्टरों का वेतन रोका

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गढ़वा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को मेराल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के औचक निरीक्षण के दौरान मिली भारी अव्यवस्था पर भड़के सिविल सर्जन ने बड़ी कार्रवाई की है।

उन्होंने कर्तव्य में लापरवाही बरतने और लंबे समय से गायब रहने के आरोप में तीन चिकित्सकों के वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही सभी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस औचक कार्रवाई से जिले के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन ने पाया कि डॉ. मुन्ना कुमार और डॉ. मृदुल पिछले करीब एक महीने से अपनी ड्यूटी से लगातार नदारद हैं। निरीक्षण के दिन भी दोनों चिकित्सक अस्पताल से गायब मिले। हद तो तब हो गई जब अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार भी मौके पर उपस्थित नहीं थे।

हालांकि, सिविल सर्जन के आने की भनक लगते ही वे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचे। सिविल सर्जन ने इस गंभीर लापरवाही को अनुशासनहीनता मानते हुए तीनों चिकित्सकों के वेतन निकासी पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मेराल सीएचसी में किसी भी एमबीबीएस चिकित्सक द्वारा नियमित ओपीडी सेवा का संचालन नहीं किया जा रहा था। इसके कारण सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सीएस ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अविलंब नियमित ओपीडी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी लापरवाही सामने आई। अस्पताल में लिपिक की कमी को दूर करने के लिए हाल ही में एक क्लर्क की पोस्टिंग की गई थी, लेकिन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा उन्हें अब तक प्रभार नहीं सौंपा गया था। सिविल सर्जन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तत्काल प्रभार हस्तांतरण कर प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित करने की हिदायत दी।

डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने दोटूक शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की पहली प्राथमिकता है। सरकारी कार्यों में किसी भी तरह की कोताही, लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि सभी कमियों को जल्द से जल्द दूर कर स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में सुधार करें, अन्यथा इससे भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कड़े रुख के बाद जिले के अन्य प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों व कर्मियों में भी खलबली मची हुई है।

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