क्या है AI स्क्वैटिंग? जिसका फायदा उठाकर आपको कंगाल बना रहे हैं हैकर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल जहां लोगों के काम को आसान करता जा रहा है, वहीं अब यह एक बड़े साइबर फ्रॉड की वजह भी बन गया है। साइबर सुरक्षा रिसर्चकर्ताओं ने एआई स्क्वैटिंग नामक एक नए और खतरनाक साइबर हमले को लेकर चेतावनी जारी की है। आइए जानते हैं इसके बारे में…
दरअसल, हैकर एआई के भ्रम यानी एआई द्वारा गलत या काल्पनिक तथ्य गढ़ने की आदत का फायदा उठाकर फर्जी वेबसाइट और सॉफ्टवेयर बनाकर लोगों को ठग रहे हैं।
क्या है एआई स्क्वैटिंग?
जब एआई किसी फर्जी वेबसाइट या सॉफ्टवेयर का नाम सुझाता है, तो हैकर उस नाम से पहले ही डोमेन या मैलवेयर रजिस्टर कर लेते हैं, जिससे यूजर्स ठगी का शिकार हो रहे हैं।
उदाहरण के लिए मान लीजिए- आपने अच्छे बैंकिंग एप के बारे में पूछा, तो एआई ने गढ़ा हुआ ‘एबीसी बैंक’ एप नाम सुझाया। चूंकि हैकर ने पहले से ही यह फर्जी एप रजिस्टर कर रखा था। लेकिन आप एआई के भरोसे इस एप को जैसे ही डाउलोड करके रजिस्टर करते हैं आपका बैंक डेटा चोरी जाता है। इसे ही साइबर सुरक्षा स्पेशलिस्ट एआई स्क्वैटिंग कहते हैं।
एआई स्क्वैटिंग पूरी तरह अलग से एक अलग टेक्नोलॉजी है। इसमें किसी प्रॉम्ट की जरूरत नहीं होती है। अब तक इसके दो प्रमुख तरीके सामने आए हैं।
पहला फैटम स्कैटिंग
फैटम स्कैटिंग में एआई द्वारा बताए गए फर्जी डोमेन नाम को साइबर ठग पहले रजिस्टर कर लेते हैं और वहां फिशिंग वेबसाइट बना देते हैं।
दूसरा हैलुस्क्वैटिंग
हैलुस्क्वैटिंग में साइबर ठगों द्वारा एआई के सुझाए काल्पनिक सॉफ्टवेयर पैकेज के नाम से मैलवेयर अपलोड कर दिया जाता है।
साइबर हमलों से क्यों अलग है एआई स्क्वैटिंग?
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, एआई स्क्वैटिंग हैकर एआई सिस्टम को हैक नहीं करते, बल्कि वह एआई के एआई के अनुमान लगाने के तरीके का फायदा उठाते हैं। इसलिए AI जो वेबसाइट, डाउनलोड लिंक, सॉफ्टवेयर पैकेज या रिपॉजिटरी बताता है, उसे बिना वेरिफाई किए न खोलें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

