आरटीपीएस केंद्र झाझा की लापरवाही का एक अद्भुत नमूना सामने आया है। यहां एक विधवा मालती देवी को जाति की आधिकारिक पहचान के लिए न सिर्फ सवा साल तक इंतजार करना पड़ा, बल्कि आठवीं बार ऑनलाइन आवेदन के पश्चात जाति प्रमाण-पत्र निर्गत हो सका, वह भी जिला पदाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद।
दरअसल, कनौदी निवासी गुलाब यादव की पुत्री मालती देवी ने पहली बार 29 मार्च 2025 को जाति प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया। 10 कार्य दिवस के भीतर 15 अप्रैल को सेवा प्रदान करने की प्रस्तावित तिथि दी गई, लेकिन सेवा नहीं मिल पाई, अर्थात उनका आवेदन खारिज हो गया।
इसी प्रकार उसने एक के बाद एक कर सात बार ऑनलाइन आवेदन किया। सातवीं बार भी रिजेक्ट हो जाने के बाद उसने किसी के बताए अनुसार अनुमंडल पदाधिकारी के यहां प्रथम अपील की। वहां भी अनुमंडल पदाधिकारी ने जब अंचल अधिकारी से प्रतिवेदन तलब किया तो अंचल अधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया और उसमें उसे सफलता भी मिल गई।
इसके पीछे क्या वजह थी, यह तो संबंधित अधिकारी ही बेहतर बता सकती हैं। उसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी के यहां भी आवेदन रिजेक्ट हो गया। तब मालती देवी ने डीएम के यहां द्वितीय अपील की। यहीं डीएम की नजर पड़ी और उन्होंने इसे गंभीर बताते हुए तत्काल जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को मामला हस्तांतरित करते हुए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।
इसके बाद लोक शिकायत में सुनवाई शुरू हुई। जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी की सख्ती के बाद अंचल अधिकारी बैकफुट पर आईं और उन्होंने आठवीं बार आवेदन करने का आग्रह मालती देवी से किया। मालती देवी ने 07 जुलाई को आवेदन किया और फिर उक्त तिथि को ही दस मिनट के भीतर उनका जाति प्रमाण-पत्र आनलाइन निर्गत हो गया।
जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी बालमुकुंद प्रसाद ने बताया कि मालती देवी को जाति प्रमाण-पत्र निर्गत कर दिया गया है। इस मामले में अंचल अधिकारी निशा सिंह से पक्ष लेने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क स्थापित नहीं हो सका।
टाइमलाइन
- 29 मार्च 2025 – प्रथम आवेदन
- 28 मई 2025 – दूसरा आवेदन
- 15 जुलाई 2025 – तीसरा आवेदन
- 10 सितंबर 2025 – चौथा आवेदन
- 29 दिसंबर 2025 – पांचवा आवेदन
- 15 फरवरी 2026 – छठी बार
- 07 मार्च 2026 – सातवीं बार
- 21 जून 2026 एसडीएम के यहां प्रथम अपील
- 24 जून 2026 अंचल अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन
- 27 जून 2026 – डीएम के यहां द्वितीय अपील
- 07 जुलाई 2026 – आठवां आवेदन
- 07 जुलाई 2026 – जाति प्रमाण-पत्र निर्गत
मलाती देवी ने कहा कि आठवीं बार में उनका आवेदन स्वीकृत किया गया, लेकिन उनकी मांग है कि इतने लंबे समय तक एक विधवा महिला को जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए जिस तरह विवश किया गया। इस आवेदन को बार-बार अस्वीकृत करने वाले अधिकारी के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई हो। सात-सात बार आवेदन अस्वीकृत हुआ। इसको लेकर एसडीएम के यहां अपील दायर किया। उसमें भी अंचलाधिकारी द्वारा एसडीएम को दिगभ्रमित करते हुए उसको भी अस्वीकृत करवा दिया।
उन्होंने कहा कि द्वितीय अपील डीएम के यहां दायर हुआ, जिसे गंभीरता से लेते हुए आवेदन को स्वीकृत कर अविलंब जाति प्रमाण-पत्र निर्गत करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद आठवीं बार उनसे ऑनलाइन आवेदन लेकर जाति प्रमाण-पत्र बनाया गया।
पति की मौत के मुआवजा के लिए प्रमाण-पत्र की पड़ी थी आवश्यकता
मालती देवी को पति शिवा द्वारिका यादव की महाराष्ट्र में 26 जनवरी को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। मुआवजे के लिए जाति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता पड़ी। इसके बाद ही उन्होंने जाति प्रमाण-पत्र के लिए भी आवेदन किया था।
बांका के गोरियारी निवासी शिव द्वारिका यादव की पत्नी मालती का मायका झाझा अंचल अंतर्गत कनौदी गांव में है। इसलिए जाति प्रमाण-पत्र के लिए उन्होंने झाझा अंचल में आनलाइन आवेदन किया था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

