भरत तिवारी एनकाउंटर केस: आरा में न्यायिक जांच आयोग के सामने पहुंचे माता-पिता; भाई-भाभी ने क्‍यों मांगी मोहलत?

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भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच तेज हो गई है। शनिवार को न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष भरत तिवारी के माता-पिता पहुंचे।

भरत तिवारी की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी न्यायिक जांच आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर घटना से जुड़े तथ्यों और अपने पक्ष को दर्ज करा रहे हैं।

वहीं, आयोग से समन मिलने के बावजूद भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी गवाही के लिए उपस्थित नहीं हुए।

भाई-भाभी ने की समय देने की मांग

दोनों ने आयोग से गवाही के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है। अगली गवाही 13 जुलाई को भी निर्धारित है।

न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा और सचिव सुबोध कुमार श्रीवास्तव इस बहुचर्चित मामले में सभी पक्षों के बयान दर्ज कर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटे है।

आयोग के समक्ष लगातार गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। ऐसे में आज माता-पिता की गवाही को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक दिन पहले चार विस्‍थाप‍ितों का हुआ था बयान

इससे पूर्व शुक्रवार को जवइनिया गांव की चार विस्थापित महिलाओं का बयान कोर्ट में कलमबंद कराया गया। कांड के अनुसंधानकर्ता संजीव कुमार ने चारों गवाहों को न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया।

दर्ज किए गए बयानों को गोपनीय रखते हुए सीलबंद कर दिया गया है। इससे पूर्व आठ जुलाई को मृतक की मां आशा देवी, भाभी सुमन देवी तथा भाई चंदन तिवारी का बयान भी न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दर्ज कराया गया था।

गौरतलब है कि मृतक की मां आशा देवी ने इस मामले को हत्या बताते हुए तत्कालीन डीएसपी, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है।

स्वजन का आरोप है कि जवइनिया गांव के विस्थापितों के पक्ष में आवाज उठाने के कारण भरत भूषण तिवारी की हत्या की गई। सरेंडर करने के बाद हत्या की गई है।

आंदोलन को धार देने दिल्ली पहुंचे भाई चंदन तिवारी

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग के समक्ष गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने वाले मृतक के भाई चंदन तिवारी के दिल्ली जाने की जानकारी सामने आई है। चंदन तिवारी इस मामले के गवाह भी हैं।

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