समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान द्वारा जिलाधिकारी को तनइया बताने के मामले में निचली अदालत से हुई दो साल की सजा के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील पर दूसरे दिन भी सुनवाई हुई। आजम खान के अधिवक्ता विनोद शर्मा ने बहस की। उनकी बहस पूरी हो गई है। अब 15 जुलाई को अभियोजन अपना पक्ष रखेगा।
तब आजम पहली बार लड़े थे लोकसभा चुनाव
सजा का यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का है। आजम खान पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े थे। तब सपा और बसपा का गठबंधन था। रामपुर लोकसभा सीट सपा को मिली थी। चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने कई बार विवादित बयानबाजी की थी। उनके खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में कई मुकदमे आचार संहिता उल्लंघन के दर्ज हुए थे। चुनाव आयोग ने उनके प्रचार पर भी रोक लगा दी थी। इनमें ही एक मुकदमा थाना भोट में दर्ज हुआ था।
तत्कालीन एसडीएम ने दर्ज कराया था केस
यह मुकदमा तत्कालीन एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी की ओर से कराया गया था। इसमें कहा था कि आजम खान का एक वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें वह वाहन पर खड़े होकर माइक से बोल रहे थे और लोग उनके वाहन के चारों ओर खड़े उन्हें सुन रहे थे। आजम ने कहा था कि डटे रहो। यह कलक्टर पलक्टर से मत डरियो। यह तनखइया हैं। तनखइयों से नहीं डरते हैं। देखे हैं मायावती जी के फोटो। कैसे बड़े-बड़े अफसर रूमाल निकालकर जूते साफ करते हैं। उन्हीं से गठबंधन है। उनके ही जूते साफ कराऊंगा इनसे अल्लाह ने चाहा।
आजम को सुनाई थी दो साल की सजा और जुर्माना
इस मुकदमे में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने आजम खान को दोषी मानते हुए 16 मई 2026 को दो साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील दाखिल की थी। अपील पर बहस चल रही है। आजम खां पक्ष के अधिवक्ता की बहस पूरी हो गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

