जंतर-मंतर पर NC के धरने को अब तक मंजूरी नहीं, CM उमर अब्दुल्ला का आरोप- ‘तारीखें बदलकर कार्यक्रम बिगाड़ने की कोशिश’

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 मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए दिल्ली प्रशासन से अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। उनका आरोप है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के पार्टी के अभियान को पटरी से उतारने की कोशिशें की जा रही हैं।

NC का यह धरना-प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन के साथ रखा गया है। पार्टी इसे एक बड़े राजनीतिक जमावड़े के तौर पर पेश कर रही है, जिसका मकसद केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है ताकि वह केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा वापस देने का अपना वादा पूरा करे।

एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए सीएम उमर ने कहा कि पार्टी ने कई दिन पहले अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है।

‘उन्होंने कहा, 20 जुलाई को एक कार्यक्रम होना है, अगर हमें उसके लिए अनुमति मिलती है। हम अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं।’ बिना किसी का नाम लिए सीएम उमर ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व NC की योजनाओं को नाकाम करने में जुटे हैं। ‘हम चार-पांच दिन से कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग हमारे कार्यक्रम को खराब करने में लगे हैं। उन्होंने अपनी तारीखें बदल दी हैं और हमारी तारीखों से मिला दी हैं।’

दूसरे संगठन को 24 घंटे में मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री ने एक अन्य संगठन के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि उसे कथित तौर पर 24 घंटे के भीतर अनुमति दे दी गई, जबकि NC चार से पांच दिन से मंजूरी का इंतजार कर रही है। यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने के NC के तेज अभियान का हिस्सा है।

अगस्त 2019 में तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था। केंद्र का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। यह बात केंद्र ने अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में भी कही थी।

देशभर के 52 नेताओं को न्योता

राजनीतिक सहमति बनाने के लिए NC ने 20 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देशभर के 52 राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को न्योता भेजा है। न्योता पाने वालों में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी, डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती, पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को भी बुलाया गया है।

इसके अलावा एनसीपी (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार, भाजपा (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई एस जगन मोहन रेड्डी, बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल, तमिल नाडु वेत्री क्षगम के संस्थापक सी जोसेफ विजय, भाकपा नेता डी राजा और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर के इन नेताओं को भी बुलावा

जम्मू-कश्मीर से डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, भाजपा के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष सत शर्मा, अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के पार्षद सज्जाद लोन, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा, माकपा नेता मुहम्मद यूसुफ तारिगामी, अवामी इत्तेहाद पार्टी के अध्यक्ष और सांसद इंजीनियर राशिद, मीरवाइज उमर फारूक और ग्रैंड मुफ्ती मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम को भी आमंत्रित किया गया है।

सिविल सोसायटी ने भी दिया समर्थन

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब कुछ दिन पहले ही नेशनल कॉन्फ्रेंस ने श्रीनगर में सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी। इसमें 150 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बिना देरी के बहाल करने का आग्रह किया था। पार्टी का कहना है कि यह मुद्दा राजनीतिक दलों से ऊपर है और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है।

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