सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी चंडीगढ़ में बेसहारा पशुओं की स्थिति जस की तस; DC से मांगा जवाब, PM के समक्ष रखेंगे बात

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 बेसहारा पशु और गोवंश को सड़कों से हटाने और उनके संरक्षण को लेकर दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के लगभग एक वर्ष बाद भी चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति जस की तस है। इस मुद्दे को लेकर गौमाता सेवक की चंडीगढ़ इकाई ने डिप्टी कमिश्नर नितिन यादव को पत्र लिखकर प्रशासन से जवाब मांगा है।

गौसेवकों का कहना है कि सात दिन तक यदि कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चंडीगढ़ दौरे के दौरान उनसे मिलने का प्रयास कर अपनी बात रखी जाएगी। संगठन का कहना है कि शहर की सड़कों पर आज भी बड़ी संख्या में बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई गौशालाओं में भी पशुओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

संगठन का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। पत्र में संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन से संबंधित सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।

इनमें आदेशों के पालन के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी का नाम, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अनुपालन रिपोर्ट (कॉम्प्लायंस रिपोर्ट) की प्रति, विभिन्न विभागों के अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारियां, अब तक सड़कों से हटाए गए आवारा पशुओं का विवरण, हेल्पलाइन की स्थापना, समीक्षा बैठकों की कार्यवाही तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा शामिल है।

राष्ट्रीय सनातन सेना भारत (सनातन सर्व सेवा संघ) गौरक्षा दल के पंजाब एवं चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष रोहित शर्मा व सेक्रेटरी मोहित शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी गंभीरता से पालन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह केवल पशु कल्याण का ही नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और जनहित का भी विषय है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि आदेशों के अनुपालन की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और आवारा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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