सुप्रीम कोर्ट विवाद का असर: भ्रष्टाचार से जनहित याचिकाओं तक… NCERT ने न्यायपालिका के पाठ को नए सिरे से लिखा

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 सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद NCERT ने मंगलवार को क्लास 8 की नई सोशल साइंस की किताब जारी कर दी है। बदली हुई किताब में न्यायपालिका से जुड़े विवादित चैप्टर को हटा दिया गया है। बदले हुए चैप्टर में अब न्यायपालिका से जुड़ी आलोचनात्मक बातों की जगह न्याय, संवैधानिक उपायों, अदालतों, ट्रिब्यूनल और विवाद सुलझाने के तरीकों को शामिल किया गया है।

चैप्टर 4 में सबसे बड़ा बदलाव

सबसे बड़ा बदलाव चैप्टर 4, ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ में किया गया है। बदले हुए वर्जन में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाला हिस्सा और एक बड़ी चुनौती के तौर पर ‘पेंडिंग मामलों (बैकलॉग)’ को हटा दिया गया है। इसके बजाय इसमें न्याय का कॉन्सेप्ट क्या है? एक न्यायपूर्ण और मिलनसार समाज के लिए यह क्यों जरूरी है? भारत में न्यायपालिका का ढांचा और भूमिका क्या है? और विवाद सुलझाने के वैकल्पिक तरीके क्या हैं? को शामिल किया गया है।

पहले वाले वर्जन में क्या था?

पहले वाले वर्जन में कहा गया था कि न्यायपालिका को ‘भ्रष्टाचार’ और ‘बहुत ज्यादा पेंडिंग मामलों’ का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही CPGRAMS के जरिए मिली शिकायतों का जिक्र किया गया था। इसमें बताया गया था कि न्यायपालिका के पास शिकायतें लेने के लिए एक तय प्रक्रिया है। 2017 से 2021 के बीच ऐसी 1600 से ज्यादा शिकायतें मिली थीं।

जिस हिस्से पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई गई थी, उसमें कहा गया था कि ‘लोग न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार का अनुभव करते हैं, साथ ही यह भी कहा गया था कि पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिशें की जा रही हैं। फरवरी में किताब जारी होने के तुरंत बाद इसपर विवाद शुरू हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बदला चैप्टर

सुप्रीम कोर्ट ने खुद मामले का संज्ञान में लेते हुए फिजिकल और डिजिटल कॉपी वापस लेने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि चैप्टर से ऐसा लगता है कि न्यायपालिका ने संस्थागत भ्रष्टाचार को तो माना, लेकिन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और न्याय तक पहुंच में अपनी भूमिका को छोड़ दिया।

बाद में NCERT ने इस किताब पर माफी मांगी और इसे फैसले में गलती बताया। संस्था ने कहा कि चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा। नया चैप्टर अब मुख्य रूप से संवैधानिक ढांचे पर केंद्रित है। इसमें कहा गया है कि न्यायपालिका सरकार के तीन स्तंभों में से एक है और विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र है।

इसमें यह भी कहा गया है कि न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि विधायिका द्वारा पारित कानून “संविधान के दायरे” में रहें और कार्यपालिका अपनी ‘भूमिका से आगे न बढ़े’।

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