Kanwar Yatra: एक पालकी में दादी और दूसरी में गंगाजल; 220 KM की यात्रा में आगे बढ़ रहे ‘श्रवण कुमार’ बने दो पोते

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सेवा का ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिलता है। हरियाणा के दो सगे भाई अपनी वृद्ध दादी को उम्र के इस पड़ाव में तीसरी बार कांवड़ यात्रा करा रहे हैं।
उनका कहना है कि जब तक दादी जीवित हैं, तब तक वे दादी को इसी तरह कांवड़ यात्रा कराते रहेंगे। पोते एक ओर पालकी में दादी तो दूसरी ओर उनके वजन के बराबर गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं। यह दूरी 220 किलोमीटर की होगी।

एक जुलाई को हरिद्वार से चले थे

हरियाणा के जिला झज्जर के गांव बहादुरगढ़ निवासी विशु व जतिन कुमार अपनी वृद्ध दादी राजबाला (75) को इस वर्ष तीसरी बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। श्रवण कुमार नाम से यह कांवड़ दोनों सगे भाई एक जुलाई को पवित्र नगरी हरिद्वार से अपनी दादी के वजन का गंगाजल लेकर व दूसरी ओर दादी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार से चले थे।

प्रत्येक दिन 7 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए शनिवार की सुबह दोनों युवक जब पुरकाजी कस्बे में कांवड़ लेकर पहुंचे तो शिव भक्तों ने देखकर उनकी प्रशंसा की। शिव भक्त विशु ने बताया कि 3 साल पहले दोनों सगे भाइयों को अपनी दादी को यात्रा करने कराने को लेकर सपना आया था।

तभी से दोनों ने भगवान शिव शंकर के आशीर्वाद से दादी को कांवड़ यात्रा कराने की ठान ली थी। तब से लगातार यह तीसरी कांवड़ है। वे ई-रिक्शा चलाकर परिवार का गुजर बसर करते हैं।

गांव के शिव मंदिर में करेंगे जलाभिषेक

वहीं दादी राजबाला ने बताया कि उन्हें बहुत खुशी है कि पोते श्रवण कुमार बनकर यात्रा करा रहे हैं। ये मेरे लाल श्रवण कुमार हैं। भगवान ऐसे पोते सबकों को दे। वे गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। सहयोगी के रूप में तीसरा पोता रोहन ई-रिक्शा चलाते हुए राजबाला की बड़ी बहन शकुन्तला को लेकर आगे बढ़ रहा है।

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