जिला नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल उस समय खुल गई, जब बीते बृहस्पतिवार रात एक गर्भवती महिला के ऑपरेशन के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। इससे भी गंभीर बात यह रही कि अस्पताल की आपातकालीन बैकअप व्यवस्था भी पूरी तरह फेल हो गई। हाॅटलाइन बिजली आपूर्ति, जनरेटर और इन्वर्टर तीनों ने एक साथ जवाब दे दिया। ऐसे में डाॅक्टरों को मोबाइल फोन की टार्च की रोशनी में ऑपरेशन पूरा करना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गर्भवती की जान पर आई आफत
जानकारी के अनुसार, रात करीब 10 बजे ऑपरेशन थिएटर में गर्भवती महिला की सर्जरी चल रही थी। इसी दौरान अचानक बिजली चली गई और ऑपरेशन थिएटर में अचानक अंधेरा छा जाने से हड़कंप मच गया। गर्भवती की जान पर बन आई। सामान्य स्थिति में ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में जनरेटर और इन्वर्टर जैसी बैकअप व्यवस्था मौजूद है, लेकिन इस बार दोनों ने काम नहीं किया।
रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा
मरीज की हालत को देखते हुए डाॅक्टरों ने बिना समय गंवाए कर्मचारियों से मोबाइल की टाॅर्च जलवाई और उसी रोशनी में ऑपरेशन जारी रखा। डाक्टरों की सूझबूझ से मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहे, लेकिन अस्पताल की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि ऑपरेशन के दौरान कोई अनहोनी हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पताल का विस्तार तो कर दिया गया, लेकिन जरूरी व्यवस्थाओं के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
हाॅटलाइन भी बेअसर, बैकअप सिस्टम भी फेल
इस भीषण गर्मी में जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था लगातार लड़खड़ा रही है। अस्पताल हाटलाइन से जुड़ा होने के कारण यहां सामान्य तौर पर बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए, लेकिन पिछले कई दिनों से बार-बार बिजली गुल होने की शिकायतें मिल रही हैं। चिंता की बात यह है कि बिजली जाते ही मरीजों की सुरक्षा के लिए लगाए गए जनरेटर और इन्वर्टर भी कई बार काम नहीं कर रहे। इससे ओपीडी, इमरजेंसी और वार्डों में इलाज प्रभावित हो रहा है और मरीजों व तीमारदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
200 बेड का दर्जा, सुविधाएं अब भी अधूरी
सरकार ने वर्ष 2024 में जिला नागरिक अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बेड का दर्जा दिया था। अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन हजार मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जबकि हर माह 25 से 30 बड़े ऑपरेशन किए जाते हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, आधुनिक संसाधनों का अभाव और तकनीकी व्यवस्थाओं के खराब रखरखाव के कारण अस्पताल की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। गंभीर मरीजों को आज भी हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

