जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष डा फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा बहाल करना ही हमारा प्रमुख राजनीतिक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पांच अगस्त 2019 के फैसले को रद कराने तक नेशनल कान्फ्रेंस अपना संघर्ष जारी रखेगी।
आज यहां एक सभा को संबोधित करत हुए डा फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत संघ में विलय संवैधानिक गारंटी और वादों पर आधारित था, जिन्हें “गैर-कानूनी और गैर-लोकतांत्रिक तरीकों” से कमजोर किया गया।फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों से उनके राजनीतिक और संवैधानिक अधिकार छीन लिए गए।
1947 की विशेष पहचान छीनी गई
उन्होंने दावा किया कि छह साल बाद भी जनता ने इन फैसलों को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने अनुच्छेद370 को भारत और जम्मू-कश्मीर के संबंधों का संवैधानिक आधार बताते हुए कहा कि इसने 1947 के बाद क्षेत्र की विशेष पहचान और स्वायत्त स्थिति की रक्षा की थी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस की विरासत का उल्लेख करते हुए फारूक ने कहा कि पार्टी ने किसानों के हित में “लैंड टू द टिलर” जैसे ऐतिहासिक भूमि सुधार लागू कर सामंती व्यवस्था को समाप्त किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और रोजगार के क्षेत्र में पार्टी के योगदान को भी रेखांकित किया।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद विकास, शांति और रोजगार के वादे खोखले साबित हुए हैं। उन्होंने केंद्र से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और लोकतांत्रिक अधिकार लौटाने की मांग की।


