धोखाधड़ी पीड़ितों की मदद को एआई का उपयोग कर रही इडी, आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक का भी उपयोग कर रही एजेंसी

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 ईडी अब धोखाधड़ी पीड़ितों की मदद के लिए एआइ आधारित टूल और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक का उपयोग कर रही है। वह इन तकनीकों का उपयोग उन वास्तविक दावेदारों की पहचान के लिए कर रही है, जिन्हें पोंजी स्कैम जैसी धोखाधड़ी में गंवाई गईं संपत्तियां और राशि वापस की जानी है।

ईडी आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और डाटा विश्लेषण का भी उपयोग कर रही है ताकि जटिल और वित्तीय अपराधों को सुलझाया जा सके और मनी लांड्रिंक, विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन और उन आर्थिक अपराधियों के खिलाफ मजबूत चार्जशीट दाखिल की जा सके, जो धोखाधड़ी करने के बाद देश से भाग गए हैं।

ईडी ने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी “ई-गवर्नेंस इनिशिएटिव” में अपनी जांच से जुड़ी नई प्रगति के बारे में जानकारी दी है।

प्रेट्र को मिले 141 पेज के इस दस्तावेज का शीर्षक “विकसित भारत 2047 एआई-इनेबल्ड, डाटा ड्राइवेन और सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस” है।

ईडी के डिप्टी डायरेक्टर मनोज मित्तल ने एक रिपोर्ट में बताया कि पोंजी स्कैम, मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम और रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामलों में लाखों निवेशक शामिल होते हैं। ये लोग ज्यादा रिटर्न या घर पाने की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई निवेश करते हैं, लेकिन ठग उनके साथ धोखाधड़ी करते हैं।

उन्होंने बताया कि अक्सर ही इस तरह की धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों की संख्या ज्यादा होती है, जिससे वास्तविक पीड़ितों की पहचान और पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने बंगाल के रोज वैली मामले का जिक्र किया, जो देश के सबसे बड़ी वित्तीय घोटालों में एक है और जिसमें अब तक 31 लाख दावेदार सामने आ चुके हैं।

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