श्रद्धा की सच्ची मिसाल: दिहाड़ी के 10,000 जोड़कर लंगर में किए दान, मणिगाम में सेवा कर रहे ग्वालियर के श्यामलाल और अनारकली

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 चेहरे पर मुस्कान, मुख पर भोले के भजन और अपनी ही धुन में मस्त शामलाल का मन इन दिनों शिवभक्तों के जूठे बर्तन साफ करने में खूब लग रहा है। शामलाल ही नहीं, उनकी पत्नी अनारकली भी पति का इस काम में बाखूबी साथ दे रहीं हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आया यह दंपती श्रीअमरनाथ यात्रा के आधार शिविर मणिगाम में लगे लंगर स्थल पर दो माह तक सेवा देने आए हैं।

अपने गांव में दिहाड़ी-मजदूरी कर गुजारा करने वाले शामलाल ने बताया कि उन्होंने सालभर मेहनत कर थोड़ा-थोड़ा कर पैसे जोड़े और 10 हजार रुपये जमा कर लंगर के लिए दे दिए।

शामलाल और अनारकली की तरह कई सेवादार इन दिनों श्रीअमरनाथ यात्रा के लिए लगाए गए लंगरों में निश्शुल्क सेवा देकर अनूठी मिसाल कायम कर रहे हैं। बालटाल से करीब 50 किलोमीटर पहले गांदरबल जिला के मणिगाम में श्रीअमरनाथ यात्रा का आधार शिविर बनाया गया है।

यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आकर रुकते हैं। शामलाल और उनकी पत्नी अनारकली इसी शिविर में ग्वालियर के लंगर संगठन के पंडाल में सेवा दे रहे हैं। शाम लाल दिनभर लंगर स्थल पर खुशी-खुशी श्रद्धालुओं के यहां-वहां पड़े जूठे बर्तन उठाकर पंडाल के पीछे अपनी पत्नी को साफ करने के लिए देते हैं।

स्वभाव से शांत 50 वर्षीय शामलाल ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष ही ठान लिया था कि लंगर सेवा के लिए जाएंगे। पवित्र गुफा के पास एक लंगर में सेवा दे रहे पवन कहते हैं, मेरा मानना है कि भगवान शिव दिन में एक बार श्रद्धालु के रूप में प्रसाद ग्रहण करने जरूर लंगर में आते हैं। इसी भावना के साथ मैं बड़ी विनम्रता और आदर के साथ शिवभक्तों को भोजन परोसता हूं। एक बार शिव दर्शन जरूर देंगे।

न जाने कब भगवान शिव के पांव दबाने का मौका मिल जाए यात्रा मार्ग पर बरारी मार्ग में 14,500 फीट की ऊंचाई पर लगाए गए करनाल के एक लंगर में सेवा दे रहा 17 साल का साहिल भी श्रद्धालुओं को जलपान कराने में व्यस्त रहता है।

श्रद्धालु थक जाते हैं तो भागकर गिलास में नींबू पानी बनाकर ले आता है। श्रद्धालु रात को थककर सो जाते हैं तो पांव भी दबा देता है। साहिल ने कहा कि न जाने कब भगवान शिव के पांव दबाने का मौका मिल जाए।

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