ट्रंप का ईरान को लेकर सख्त बयान और अब हार्मुज में अशांति; भारत के लिए क्या हैं मायने?

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अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने गुरुवार रात को ईरान पर हमला कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन में सीजफायर को समाप्त बताते हुए ईरान पर नए हमलों की चेतावनी दी है।

इसके साथ ही हार्मुज में जहाजों पर हमलों और अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बाद तेल परिवहन जोखिम भरा हो गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं।

ट्रंप ने अंकारा में कहा कि शांति वार्ता समय की बर्बादी है। उन्होंने ईरानी हमलों के बाद सीजफायर खत्म होने की घोषणा की और चेतावनी दी, हमने कल रात उन्हें बहुत जोरदार मारा। आज रात फिर जोरदार हमला कर सकते हैं।

भारत पर क्या असर?

हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। युद्ध से पहले यहां से भारत का लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल, 60 फीसदी एलएनजी और 90 फीसदी एलपीजी आयात होता था। नई अशांति से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की स्थिति

भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति अपेक्षाकृत विविध है। केपलर के लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, पिछले 100 दिनों में भारतीय रिफाइनरियों ने विविध स्रोतों से आपूर्ति प्रबंधित की है।

  • रूस मुख्य आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
  • सऊदी अरब और यूएई से वैकल्पिक रास्तों से तेल आ रहा है
  • पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से अतिरिक्त आपूर्ति हो रही है

एलपीजी और एलएनजी पर ज्यादा खतरा

कच्चे तेल की तुलना में एलपीजी और एलएनजी पर ज्यादा असर पड़ सकता है। भारत इनके लिए मध्य पूर्व पर बहुत निर्भर है। वैकल्पिक स्रोत (जैसे अमेरिका) दूर होने से ट्रांजिट समय और लागत बढ़ेगी। लंबे समय तक अस्थिरता से कीमतें बढ़ सकती हैं और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

भारत की तैयारियां
भारत सरकार हार्मुज से गुजर रहे 9 भारतीय टैंकरों (जिनमें कच्चा तेल और एलपीजी भरा है) की सुरक्षा पर नजर रखे हुए है। इन पर करीब 198 भारतीय नाविक सवार हैं। विदेश मंत्रालय ईरानी अधिकारियों से संपर्क कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।

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