हाईवे के गड्ढों की AI से होगी निगरानी, जानें कैसे काम करेगा NHAI का हाई-टेक सर्वे सिस्टम?

सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त सबसे बड़ा डर गड्डा होता है, जिसके अचानक आ जाने से गाड़ी का बैलेंस बिगड़ जाता है और हम दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। लेकिन अब देश के नेशनल हाईवे को सुरक्षित और गड्ढा-मुक्त बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है।

दरअसल, अब हाईवे पर गड्ढों, टूटी सड़कों और अवैध अतिक्रमण जैसी समस्याओं की पहचान इंसानों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) करेगी। इसके लिए NHAI देशभर के करीब 40 हजार किलोमीटर हाईवे नेटवर्क पर एआई-आधारित डैशकैम और आधुनिक सर्वे सिस्टम तैनात कर रहा है, जिससे महीनों में होने वाला सर्वे अब महज 10 दिनों में पूरा हो सकेगा।

इस सिस्टम का मकसद सड़कों की बेहतर देखभाल, सेफ्टी को मजबूत करना और रियल टाइम में रोड की स्थिति पर नजर रखना है। आइए जानते हैं, यह तकनीक क्या है और कैसे काम करेगी।

क्या है नईं व्यवस्था?

नई एआई निगरानी व्यवस्था के तहत रूट पेट्रोल वाहनों में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए जाएंगे। यह वाहन हर सप्ताह हाई का सर्वे करेंगे। कैमरों से मिलने वाले फुटेजों का एआई जांच करेगा और 30 से अधिक प्रकार के कमियों की पहचान करेगा।

कैसे करेगा काम?

  • हाईवे की निगरानी को हाई-टेक बनाने के लिए NHAI ने 3D लेजर तकनीक से लैस नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) तैनात किए हैं।
  • डिजिटल मैपिंग- ये आधुनिक वाहन चलते-चलते ही सड़क की पूरी सतह का एक सटीक डिजिटल नक्शा तैयार कर लेते हैं।
  • सुपरफास्ट स्पीड- पहले सर्वे में कई दिन लगते थे, लेकिन अब एक अकेला NSV वाहन रोजाना करीब 300 किमी सड़क का सर्वे कर सकता है।
  • समय की बचत- पहले जिस सर्वे रिपोर्ट को तैयार होने में 4 से 6 महीने का लंबा समय लगता था, वह अब महज 10 दिनों में तैयार हो जाएगी।

क्या होंगे फायदे?

इस तकनीक से सड़कों की मामूली खराबी या गड्ढे भी तुरंत पकड़ में आ जाएंगे। जिससे सड़कों की समय रहते मरम्मत की जा सकेगी और सफर को सुरक्षित किया जा सकेगा।

यह तकनीक क्यों जरूरी है?

भारत में नेशनल हाईवे नेटवर्क कुल सड़कों का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन देश का सबसे ज्यादा माल और यात्री परिवहन इसी नेटवर्क पर निर्भर है। AI निगरानी से सड़कों की कमियां तुरंत सुधरेंगी, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही समय पर मरम्मत होने से सड़कों की क्वालिटी और लाइफ दोनों मजबूत होंगी।

किन देशों में पहले से हो रहा है इस्तेमाल?

दुनिया के कई विकसित देश पिछले कुछ वर्षों से इस एआई-आधारित तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें- अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं।

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