विदेश के ‘सुनहरे सपने’, इंतजार और बेबसी के दर्द में ‘अपने’

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बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर विदेश जाने वाले पूर्वांचल के कई युवाओं के लिए यह सफर मुश्किलों से भरा साबित हो रहा है। आकर्षक वेतन और बेहतर भविष्य के वादों के बीच कुछ लोग गलत एजेंटों, संदिग्ध संस्थाओं या कंपनियों के जाल में फंस जा रहे।

नतीजा यह हो रहा है कि कोई लापता हो जा रहा , किसी के पासपोर्ट और आवाजाही पर रोक लग जा रही, तो किसी के बारे में परिवार को महीनों तक कोई जानकारी नहीं । ऐसे हालात में हजारों किलोमीटर दूर फंसे लोगों से ज्यादा दर्द उनके परिजनों को झेलना पड़ रहा है, जो हर दिन किसी फोन काल या अच्छी खबर का इंतजार कर रहे।

जिले में ऐसे ही तीन मामलों ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। जिला प्रशासन ने तीनों मामलों की रिपोर्ट तैयार कर उत्तर प्रदेश शासन को भेजा। इसके बाद शासन ने औपचारिक रूप से विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सीपीवी (कांसुलर, पासपोर्ट एवं वीजा) प्रभाग को पत्र भेजकर संबंधित देशों में भारतीय दूतावासों और अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

इसमें लापता व्यक्ति का पता लगाने, सुरक्षा सुनिश्चित कराने, वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराने तथा जहां संभव हो, भारत वापसी में सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।

इसके बाद चार दिन पहले एक की वापसी तो हाे गई लेकिन दो युवकों के परिवार के लोग अभी भी परेशान हैं। इन मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि विदेश जाने से पहले एजेंट, कंपनी और रोजगार संबंधी सभी दस्तावेजों की सही जांच कितनी जरूरी है। कई बार युवाओं को रोजगार का भरोसा देकर विदेश भेज दिया जाता है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद वास्तविक परिस्थितियां बिल्कुल अलग निकलती हैं।

वेतन मांगने पर नौकरी गई, ट्रैवल बैन में फंस गया कैलाश
गुलरिहा क्षेत्र के भभौर गांव की बेली देवी का बेटा कैलाश कुमार वर्ष 2023 में दुबई में निर्माण कार्य के लिए गया था। परिजनों के अनुसार कंपनी में तय वेतन नहीं मिलने पर उसने विरोध किया और भारत लौटने की इच्छा जताई। आरोप है कि इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया और फर्जी तरीके से भारी जुर्माना लगवाकर उस पर ट्रैवल बैन लगवा दिया। इससे वह स्वदेश नहीं लौट पा रहा है। बेटे की बेबसी देख मां ने प्रशासन से मदद मांगी।

अब प्रदेश शासन ने विदेश मंत्रालय से नियमानुसार कार्रवाई कर कैलाश कुमार की भारत वापसी सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है।रो-रोकर बेहाल हो चुकी मां बेली का कहना है कि पता होता कि बेटा फंस जाएगा, तो हर मुसीबत झेल लेते लेकिन कैलाश को कभी विदेश न भेजते। उनका कहना है कि अब तो शासन-प्रशासन से ही आस है।

इजराइल गया पवन, एक काल के बाद बंद हो गया मोबाइल
पीपीगंज के वार्ड नंबर तीन, आजाद नगर निवासी आनंद कुमार चौरसिया के बड़े भाई पवन कुमार चौरसिया मई 2024 में रोजगार के लिए इजरायल गए थे। 26 अप्रैल 2026 को परिवार की उनसे आखिरी बार व्हाट्सएप काल पर बातचीत हुई। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। परिवार ने कंपनी के प्रबंधक और सहकर्मियों से संपर्क किया तो सिर्फ इतना बताया गया कि पवन किसी मामले में बंद हैं, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

कई दिनों तक कोई ठोस सूचना नहीं मिलने पर परिवार ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई। शासन ने विदेश मंत्रालय से पवन कुमार की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और परिवार को जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

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