कई बार झुंझलाहट में आपने किसी न किसी को भाड़ में जाने जरूर कहा होगा। ये मुहावरा काफी कॉमन है और अक्सर हम इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप इसका मतलब जानते हैं?
आमतौर पर हम इसका मतबल समझ लेते हैं कि किसी को नर्क में जाने के लिए कह रहे हैं, जैसे अंग्रेजी में गो टू हेल कह देते हैं, लेकिन इसका असली मतलब इससे बिल्कुल अलग है और शायद आपको मालूम भी न हो। आइए समझें की भाड़ होता क्या है और क्यों इसका इस्तेमाल इस मुहावरे में किया जाता है।
भाड़ होता क्या है?
भाड़ का मतलब जहन्नुम नहीं होता। ये एक मिट्टी या ईंटो से बना एक पारंपरिक देसी चूल्हा होता था। यहां समझना जरूरी है कि ये आम चूल्हे से अलग होता था। ये आकार में बड़ा और गहरा होता था, जिसका इस्तेमाल बड़ी मात्रा में चना, मक्का या मूंगफली भूनने के लिए किया जाता था।
भाड़ को चलाने वाले या इसमें अनाज पकाने वाले व्यक्ति को भड़भूजा कहा जाता था। भाड़ की बनावट ऐसी होती थी कि इसके नीचे तेज आग जलाई जाती थी और इसके ऊपर बड़े मटके या कड़ाही में रेत डालकर अनाज को भूना जाता था। इसमें तेल या घी का इस्तेमाल नहीं होता था, सिर्फ तेज गर्माहट से अनाज को भूना जाता था और छलनी से अनाज को रेत से बाहर निकाला जाता था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

