खेत में पानी लगाते समय नहर में गिरकर जान गंवाने वाले किसान के परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा मिलेगा। इसके लिए किसान की पत्नी भिवानी निवासी कमला देवी को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से न्याय मिला।
मार्केट कमेटी और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने तकनीकी आधार पर मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने दोनों विभागों के आदेश को रद करते हुए हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया।
याचिका के अनुसार, कमला के पति राम कुमार 30 जुलाई 2024 की रात करीब 10 बजे अपने खेत के पास नहर के मोघे को बंद करने का प्रयास कर रहे थे। नहर में पानी का बहाव काफी तेज था।
इसी दौरान वह संतुलन खोकर नहर में गिर गए और डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना-2013 के तहत पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था।
सरकारी विभा ने दावा किया था खारिज
हालांकि, मार्केट कमेटी सिवानी के सचिव ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नहर का मोघा बंद करना सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का कार्य है और मृतक उस समय कृषि कार्य में संलग्न नहीं था। बाद में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सचिव ने भी अपील खारिज करते हुए इसी आधार को सही ठहराया।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि किसान ने आत्महत्या नहीं की थी, लेकिन यह तर्क दिया गया कि नहर का मोघा बंद करना उसका दायित्व नहीं था। इसलिए उसका मामला योजना के दायरे में नहीं आता।
सरकार को याद दिलाया योजना का उद्देश्य
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना-2013 का उद्देश्य दुर्घटनाओं में किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
योजना में विभिन्न परिस्थितियों को शामिल किया गया है और इसका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को राहत देना है, न कि उन्हें तकनीकी आधार पर लाभ से वंचित करना।
हाई कोर्ट ने कहा कि रात के समय जब खेतों में पानी का तेज बहाव था, तब किसान का स्वयं मोघा बंद करने का प्रयास करना अस्वाभाविक नहीं माना जा सकता। उस समय उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती थी कि वह पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बुलाए।


