विवादों के चलते सुर्खियों में रहने वाले शिक्षा विभाग में जो हो जाए, वो कम है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें विभाग की गलती का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा है। ऐसा ही एक मामला देवास जिले में सामने आया है। छात्रा ने परीक्षा तो फिजिक्स विषय की दी थी, लेकिन उसे जो अंकसूची दी गई, उसमें संस्कृत विषय लिखा आया। अब छात्रा सुधार के लिए इधर-उधर भटक रही, लेकिन कहीं से कुछ समाधान नहीं मिल पा रहा।
छात्रा के साथ ऐसे हुई गड़बड़ी
जिले के करनावद में शासकीय विद्यालय की छात्रा टीना बागवान ने 2025 में विज्ञान संकाय (फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायो) से 12वीं की परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम आया तो चार विषयों में पूरक आई। इसके बाद द्वितीय परीक्षा में शामिल हुईं। इसमें भी दो विषयों में पूरक आई। आखिर में सरकार की योजना के तहत रुक जाना नहीं के तहत फिर से फार्म भरा। 500 रुपये प्रति विषय के हिसाब से दो हजार रुपये खर्च कर फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलाजी और हिंदी विषय की परीक्षा दी। प्रवेश पत्र पर भी सही था और जब पेपर दिया तो चारों विषय के ही प्रश्न पत्र दिए गए।
छात्रा को उम्मीद थी कि इस बार परिणाम में उत्तीर्ण हो जाएगी, लेकिन जब अंकसूची आई तो उसे देखकर होश उड़ गए। अंकसूची में फिजिक्स विषय के स्थान पर संस्कृत लिखा हुआ था। छात्रा ने बताया कि उसने पेपर फिजिक्स का दिया था तो अंकसूची में संस्कृत कैसे आया। छात्रा अंकसूची में सुधार के लिए यहां से वहां भटक रही है, लेकिन उसे अब तक समाधान नहीं मिल पाया है।
पहले दिए तीन नंबर, री-चेकिंग में हुए 63
शिक्षा विभाग में गड़बड़ी के मामले और भी हैं। हाल ही में कमलापुर क्षेत्र की निवासी छात्रा पलक चौहान को 12वीं के परीक्षा परिणाम में अंग्रेजी विषय में सिर्फ तीन नंबर दिए गए। छात्रा ने जब री-चेकिंग का फार्म भरा तो तीन से बढ़कर 63 अंक हो गए। इसी तरह कुछ अन्य विद्यार्थी भी हैं, जिनके रीचेकिंग में अंक बढ़े। इसके बाद मूल्यांकन प्रक्रिया सवालों के घेरे में आई। शिक्षा विभाग से जुड़े कुछ लोग इसे टाइपिंग त्रुटि भी बता रहे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

