गोस्वामी श्रृंखला-5: जिस अधिकारी के कार्यकाल में मिला प्रमोशन, वह खुद बाद में रिश्वत लेते लोकायुक्त से हुआ था ट्रैप!
सिंगरौली। नगर पालिका निगम सिंगरौली के विद्युत विभाग में कार्यरत प्रवीण कुमार गोस्वामी की पदोन्नति को लेकर सवालों का सिलसिला लगातार जारी है। इस श्रृंखला की पांचवीं कड़ी में एक नया पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 में जिस समय गोस्वामी को पदोन्नति देकर उपयंत्री (विद्युत) के पद पर पदस्थ किया गया, उस समय पदोन्नति प्रक्रिया की जिम्मेदारी तत्कालीन उपायुक्त सी.पी. पांडेय के निर्देशन में थी। बाद के वर्षों में यही अधिकारी अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में ट्रैप हुआ था।

सूत्रों के अनुसार, उस समय नगर पालिका निगम में पदोन्नति संबंधी मामलों का दायित्व तत्कालीन उपायुक्त सी.पी. पांडेय के पास था। ऐसे में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जिस अधिकारी पर बाद में भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने की कार्रवाई हुई, उसके कार्यकाल में हुई पदोन्नतियों की निष्पक्षता की भी जांच होनी चाहिए या नहीं।
पद ही नहीं था तो पदोन्नति कैसे हुई?
मामले का सबसे बड़ा प्रश्न यह बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 में जिस पद पर प्रवीण कुमार गोस्वामी को पदोन्नति दी गई, क्या उस समय नगर पालिका निगम सिंगरौली में वह स्वीकृत एवं रिक्त पद उपलब्ध था? यदि पद उपलब्ध नहीं था, तो फिर किस नियम, आदेश या प्रावधान के आधार पर पदोन्नति की गई? इसी बिंदु को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यदि पदोन्नति नियमों के अनुरूप हुई थी तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।
इस मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर यह मांग भी उठ रही है कि प्रवीण कुमार गोस्वामी की पदोन्नति से संबंधित समस्त अभिलेखों, विभागीय नोटशीट, चयन प्रक्रिया तथा उस समय की स्वीकृत पद संरचना की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
ये सवाल भी चर्चा में?
- वर्ष 2013 में उपयांत्रिक (विद्युत) का स्वीकृत पद उपलब्ध था या नहीं?
- यदि पद रिक्त नहीं था तो पदोन्नति किस नियम के तहत की गई?
- पदोन्नति प्रक्रिया में किन अधिकारियों ने अनुमोदन दिया?
- क्या पूरी प्रक्रिया मध्यप्रदेश शासन के सेवा नियमों के अनुरूप थी?
- क्या इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?
पक्ष जानना भी जरूरी
इस पूरे मामले में प्रवीण कुमार गोस्वामी, तत्कालीन पदोन्नति प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों अथवा नगर निगम प्रशासन का पक्ष सामने आना शेष है। यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण या दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, तो उन्हें भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

