आरा जंक्शन पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख स्टेशनों में शुमार हो चुका है। सालाना 135 करोड़ रुपये के आसपास राजस्व अर्जित करने वाला यह स्टेशन अब रेलवे की आय के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। बावजूद इसके, यात्रियों की वर्षों पुरानी मांगें अब भी अधूरी हैं।
सबसे बड़ी मांग पटना-इंदौर एक्सप्रेस के ठहराव की है। 24 साल पहले शुरू हुई इस ट्रेन का आरा जंक्शन पर आज तक स्टॉपेज नहीं दिया गया, जिससे यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
2002 में शुरू हुई ट्रेन, लेकिन शाहाबाद क्षेत्र को नहीं मिला लाभ
19313/14 पटना-इंदौर एक्सप्रेस की शुरुआत वर्ष 2002 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने की थी।
उस समय ट्रेन को पटना जंक्शन के बाद सीधे मुगलसराय (वर्तमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) तक चलाया गया।
शाहाबाद क्षेत्र के प्रमुख स्टेशन आरा को इस सेवा से बाहर रखा गया। तब से लेकर अब तक कई सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और यात्रियों ने ठहराव की मांग उठाई, लेकिन रेलवे प्रशासन की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिला।
महाकाल दर्शन और रोजगार के लिए हजारों यात्रियों की निर्भरता
भोजपुर जिले से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के दर्शन के लिए जाते हैं। वहीं हजारों छात्र और कामगार इंदौर में पढ़ाई और रोजगार के सिलसिले में रहते हैं।
सीधी ट्रेन सुविधा नहीं होने के कारण यात्रियों को पटना या बक्सर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है।
इससे समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है। यात्रियों का कहना है कि आरा में ठहराव मिलने से बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।
चार राजधानी एक्सप्रेस गुजरती हैं, लेकिन किसी का नहीं है ठहराव
आरा जंक्शन से होकर चार राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। इसके बावजूद किसी भी राजधानी ट्रेन का यहां ठहराव नहीं है।
जबकि बिहार के कई अन्य स्टेशनों को समय-समय पर राजधानी एक्सप्रेस का स्टॉपेज मिल चुका है।
हाल के वर्षों में मानसी, नवगछिया, दानापुर और साहिबगंज जैसे स्टेशनों को राजधानी ट्रेनों का लाभ मिला है। इसके विपरीत आरा जंक्शन लगातार उपेक्षा का शिकार बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
यात्रियों ने उठाई रेलवे से ठोस पहल की मांग
रेल यात्री पंकज कुमार का कहना है कि पटना-इंदौर एक्सप्रेस एक महत्वपूर्ण मेल-एक्सप्रेस ट्रेन है और इसका आरा में ठहराव जनहित में आवश्यक है।
वहीं रोहित कुमार के अनुसार, राजस्व और यात्री संख्या के लिहाज से आरा अब बड़े स्टेशनों की श्रेणी में पहुंच चुका है।
राम बाबू सिंह का कहना है कि ट्रेन नहीं रुकने से यात्रियों का चार से पांच घंटे अतिरिक्त समय बर्बाद होता है।
इसके अलावा धनबाद के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने और इंटरसिटी एक्सप्रेस का विस्तार आरा तक करने की मांग भी उठाई गई है।
रेल मंत्रालय से अब फैसले का इंतजार
रेल फैन क्लब आरा के सदस्य संदीप कुमार का कहना है कि आरा जंक्शन से भारी राजस्व मिलने और आसपास के कई जिलों की निर्भरता के बावजूद एक्सप्रेस ट्रेनों का पर्याप्त ठहराव नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।


