अलीगढ़ में बोलीं राज्यपाल- डिग्री के साथ संस्कार भी जरूरी, बेटा-बेटी में भेदभाव स्वीकार नहीं; 50 मेधावियों को बांटे मेडल व उपाधि

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 उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने रविवार को राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रहने, बल्कि संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए। बेटा-बेटी में भेदभाव समाप्त करना होगा और विद्यार्थियों को माता-पिता के सम्मान के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को जीवन में अपनाना चाहिए।राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से तीन वर्षों की उपलब्धियों का विस्तृत मूल्यांकन करने को कहा। उन्होंने पूछा कि विश्वविद्यालय ने स्थापना के बाद शिक्षा, शोध और गुणवत्ता के क्षेत्र में कितनी प्रगति की है। शिक्षकों के रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियुक्तियां नियमों के अनुसार शीघ्र पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हजारों नियुक्तियां हुई हैं और उनमें गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली है। पदोन्नति में भी पूरी पारदर्शिता और नियमों का पालन होना चाहिए।

राज्यपाल बोलीं- डिजिलॉकर अपनाएं, शिक्षा का उद्देश्य समाज में बदलाव लाना होना चाहिए

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय महान शिक्षाविद एवं स्वतंत्रता सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर है। ऐसे में विद्यार्थियों को उनके जीवन और विचारों पर चर्चा करनी चाहिए। विश्वविद्यालयों में महान विभूतियों के जीवन पर नियमित वाद-विवाद और संगोष्ठियां आयोजित हों, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके।

शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सरोकारों पर दिया जोर

राज्यपाल ने छात्राओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए एक छात्रा से संवाद का उदाहरण साझा किया। उन्होंने कहा कि छात्रा ने बताया कि वह सरकारी संस्थान में पढ़ रही है, जबकि उसका भाई निजी विद्यालय में पढ़ता है। यह स्थिति बदलनी होगी। बेटियों को समान अवसर देना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर में एक छात्रा ने मंच से घरों में बेटियों के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा उठाया था, जिसे समाज को गंभीरता से लेना चाहिए।

समर्थ पोर्टल और डिजिलॉकर जैसी व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी

डिजिटल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि अब विद्यार्थियों की अंकतालिकाएं डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। पहले छात्रों को दस्तावेजों के लिए विश्वविद्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और कई जगह अनावश्यक परेशानियां होती थीं। समर्थ पोर्टल और डिजि लॉकर जैसी व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है और विद्यार्थियों को राहत मिली है।

छात्र नियमित रूप से अखबार पढ़ें

कुलाधिपति ने कहा कि विद्यार्थी नियमित रूप से अखबार पढ़ें, क्योंकि इससे सामान्य ज्ञान और समाज की समझ विकसित होती है। साथ ही अच्छे हस्तलेख पर भी ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कई बार उत्तर पुस्तिकाओं में लिखावट इतनी अस्पष्ट होती है कि परीक्षक पढ़ ही नहीं पाता, जिससे छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है।

वैक्सीन लगाने पर दिया जोर

राज्यपाल ने छात्राओं के स्वास्थ्य पर भी चिंता जताई। उन्होंने नौ से 14 वर्ष की बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम संभव है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल एयरपोर्ट और एम्स बनने से नहीं बनेगा, बल्कि स्वस्थ समाज से बनेगा। विश्वविद्यालयों में छात्राओं के हीमोग्लोबिन परीक्षण और स्वास्थ्य जांच अभियान नियमित चलाए जाने चाहिए।

आंगनबाड़ी केंद्रों में किट वितरण

सीएसआर के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में किट वितरण, टीबी मरीजों के लिए चलाए जा रहे जनसहयोग अभियान और समाज की भागीदारी का भी उल्लेख किया। साथ ही विश्वविद्यालयों से कहा कि वे केवल एमओयू तक सीमित न रहें, बल्कि शोध, पुस्तक लेखन और नवाचार के रूप में उसके परिणाम भी सामने लाएं।
समारोह के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे डिग्री के साथ अनुशासन, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी जीवन का हिस्सा बनाएं तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

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