J&K बैंक में 60 लाख का लोन फ्रॉड, EOW ने श्रीनगर के 5 जालसाजों के खिलाफ कोर्ट में पेश की चार्जशीट

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 जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कश्मीर ने बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू ने श्रीनगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन सभी पर जाली और नकली दस्तावेजों के सहारे बैंक से ₹60 लाख का लोन लेकर गबन करने का गंभीर आरोप है।

इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई चार्जशीट

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस धोखाधड़ी मामले में श्रीनगर के रहने वाले पांच आरोपियों को नामजद किया गया है।

J&K बैंक धोखाधड़ी मामले के आरोपियों का विवरण

क्र.सं. आरोपी का नाम पिता का नाम निवासी (इलाका)
1. शेख समीउल्लाह अब रशीद शेख आरामपोरा नवाकदल
2. अब अहद भट गुलाम मोहिउद्दीन भट मुफ्ती बाग हरवान
3. गुलाम नबी बाकल गुलाम रसूल बाकल सदेराबल हजरतबल
4. मुश्ताक अहमद सूफी मोहम्मद यासीन सूफी HMT ज़ैनकोट
5. सरताज अहमद हकीम अब रज़ाक हकीम नई सड़क हब्बा कदल

पुलिस ने इन सभी के खिलाफ FIR नंबर 05/2019 के तहत तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की है।

फर्जी रेवेन्यू रिकॉर्ड पर लिया गया था ₹60 लाख का लोन

ईओडब्ल्यू के मुताबिक, इस मामले की जांच तब शुरू हुई थी जब जम्मू-कश्मीर बैंक ने इस धोखाधड़ी को लेकर एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने साल 2007 में जेएंडके बैंक की ज़ैनकोट शाखा से ₹30 लाख का टर्म लोन लिया था।

इसके साथ ही, बैंक की ही रेजिडेंसी रोड शाखा से ₹30 लाख की कैश क्रेडिट सुविधा भी हासिल की थी। यह पूरा लोन बैंक के पास प्रॉपर्टी गिरवी रखकर लिया गया था, जिसके लिए आरोपियों ने जाली टाइटल दस्तावेज और फर्जी रेवेन्यू रिकॉर्ड्स (राजस्व दस्तावेज) का इस्तेमाल किया था।

जांच में हुआ गबन का खुलासा

लोन की रकम लेने के बाद जब कर्जदारों ने बैंक को पैसे वापस नहीं लौटाए, तब बैंक की तरफ से इस पर कार्रवाई शुरू हुई। रेवेन्यू अधिकारियों द्वारा की गई आधिकारिक जांच में यह पुष्टि हुई कि लोन लेने के लिए जो रेवेन्यू रिकॉर्ड और दस्तावेज बैंक के पास गिरवी रखे गए थे, वे पूरी तरह से जाली थे।

जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी शेख समीउल्लाह ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बैंक को चूना लगाने और लोन की राशि को आपस में ठिकाने लगाने की पूरी साजिश रची थी।

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