अखिलेश यादव की लीडरशिप इतनी हल्की हो गई… सपा सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर की लड़ाई में अब भाजपा की एंट्री

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 सांसद रुचि वीरा व कांठ विधायक कमाल अख्तर के बीच चल रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व बयानबाजी में भाजपा से शहर विधायक रितेश गुप्ता ने भी एंट्री की है। दोनों के बीच चल रहे घटनाक्रमों को लेकर शहर विधायक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मुरादाबाद का झगड़ा सपा की असली तस्वीर उजागर कर गया।

बिना सांसद रुचि वीरा को बताए पीडीए बैठक आयोजित करने पर अखिलेश यादव को लखनऊ में आपसी कलह निपटानी पड़ी। नेताओं में जमकर हुई तू-तू मैं-मैं और चीफ व्हिप पद से इस्तीफा दिलवाना दरअसल सपा की बेहद कमजोर स्थिति और बेबसी को दिखाता है।

शहर विधायक की इस प्रतिक्रिया पर सांसद ने उलटा उन्हें ही नसीहत दी। कहा कि वह अपने बारे में सोचें, अपनी पार्टी के बारे में सोंचे। हमारी पार्टी में ताक-झाक ना करें। सवाल करते हुए यह भी कहा कि क्या उनके वहां झगड़े नहीं हैं?

सांसद ने विधायक को दी नसीहत- अपने बारे में सोचे, हमारी पार्टी में ना करें ताक-झाक

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत समाजवादी पार्टी की ओर से आयोजित की जा रही पीडीए की बैठक में सांसद रुचि वीरा को ना बुलाए जाने से शुरू हुआ। बैठक में ना बुलाए जाने पर सांसद ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि मसले को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष रखा जाएगा। ऐसी हरकत कर पार्टी को कमजारे करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जाएगी।

फेसबुक पर शहर विधायक ने लिखा-मुरादाबाद का झगड़ा सपा की असली तस्वीर उजागर कर गया

मामला, राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचता कि इस बीच सांसद व कांठ विधायक कमाल अख्तर के बीच तल्खियां सार्वजनिक मंच पर आ गईं। लखनऊ में बहस के वीडियो के साथ इंटरनेट मीडिया पर नेताओं के बीच खुला पोस्टरवार सामने आ गया। सपा का स्थानीय स्तर पर जिला संगठन भी दोनों के बीच बढ़ते विवाद को नहीं सुलझा पाया। इस बीच दोनों की लखनऊ में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष बैठक हुई।

कांठ विधायक ने विधानमंडल में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया

बैठक के बाद ही कांठ विधायक ने विधानमंडल में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया। जिसे सीधे तौर पर सांसद से लंबे समय से चल रहे मतभेद को जोड़कर देखा गया। हालांकि, पद छोड़ने पर विधायक की ओर से कहा गया था कि यह इस्तीफा उन्होंने अखिलेश यादव के कहने पर दिया है। पार्टी के कार्यकर्ता हैं और जो भी आदेश उनके नेता देंगे। उसका पालन करेंगे। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे सांसद से विवाद की बात को भी खारिज किया था।

प्रकरण में सांसद ने कहा था कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को हमें लखनऊ बुलाया था, जहां पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। हमने पूरे घटनाक्रम और सभी शिकायतों को रखा। उन्होंने भराेसा दिलाया कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

विधायक ने आगे लिखा…अखिलेश यादव की लीडरशिप इतनी हल्की हो गई

शहर विधायक ने फेसबुक पर किये गए पोस्ट में नेताओं में जमकर हुई तू-तू मैं-मैं और चीफ व्हिप पद से इस्तीफा दिलवाना दरअसल सपा की बेहद कमजोर स्थिति और बेबसी को दिखाता है के आगे लिखा कि अखिलेश यादव की लीडरशिप इतनी हल्की हो गई कि एक जिले की बैठक भी पूरे संगठन को हिला देती है।

शहर विधायक ने लिखा जनता के सामने अब सपा एक टूटते हुए घर की तरह नजर आ रही है, जहां हर नेता अपनी मर्जी चलाना चाहता है। चुनाव से पहले यह अंदरूनी कलह सपा को भारी पड़ेगी। सपा की यह फूट दिखा रही है कि यह पार्टी अब सिर्फ नाम की रह गई है, असल में खोखली और बिखरी हुई है।

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