गोरखपुर में गहराता जल संकट, कई इलाकों में जलस्तर 10 मीटर से भी नीचे पहुंचा

 शहर के तेजी से हो रहे शहरीकरण और प्राकृतिक जल स्रोतों की अनदेखी का असर अब जमीन के भीतर साफ दिखाई देने लगा है। नगर निगम क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे खिसक रहा है। सरकारी हाइड्रोग्राफ स्टेशनों से मिले वर्ष 2023 से 2026 तक के आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि शहर के कई इलाकों में वाटर टेबल तेजी से नीचे की ओर जा रहा है।

प्री-मानसून (पीआरएम) और पोस्ट-मानसून (पीटीएम) आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन से पता चलता है कि वर्षा के बाद भी कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ता कंक्रीट का फैलाव, तालाब-पोखरों का कम होना और भूजल का अत्यधिक दोहन आने वाले वर्षों में शहर के लिए बड़ा जल संकट खड़ा कर सकता है।

बक्शीपुर और नार्मल इलाके में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक
नगर निगम क्षेत्र के हाइड्रोग्राफ स्टेशनों में सबसे गंभीर स्थिति राजकीय जुबली इंटर कालेज क्षेत्र बक्शीपुर की सामने आई है। यहां वर्ष 2025 के प्री-मानसून में भूजल स्तर 11.05 मीटर नीचे दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2026 में और नीचे जाकर 11.80 मीटर तक पहुंच गया। एक साल के भीतर करीब 75 सेंटीमीटर की गिरावट यह संकेत दे रही है कि इस क्षेत्र में जमीन के अंदर पानी का पुनर्भरण (रीचार्ज) तेजी से प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, घनी आबादी वाले इलाकों में पक्के निर्माण और जल निकासी की बदलती व्यवस्था इसका बड़ा कारण हो सकती है। राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कालेज नार्मल क्षेत्र में भी भूजल संकट बढ़ता नजर आ रहा है। वर्ष 2025 में प्री-मानसून जलस्तर 9.55 मीटर था, जो वर्ष 2026 में गिरकर 10.10 मीटर नीचे पहुंच गया। यानी महज एक वर्ष में आधे मीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह स्थिति बताती है कि शहर के पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जमीन के भीतर पानी की उपलब्धता लगातार कम हो रही है।

हांसुपुर और सूर्यकुंड में भी हालात गंभीर

हांसुपुर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2023 में यहां प्री-मानसून जलस्तर 9.55 मीटर था, जो वर्ष 2024 में 10.30 मीटर तक पहुंच गया। वर्ष 2026 में भी यह करीब 9.90 मीटर नीचे बना हुआ है। इसी तरह सूर्यकुंड क्षेत्र में भी भूजल स्तर लगातार नीचे गया है। वर्ष 2023 में यहां प्री-मानसून स्तर 7.55 मीटर था, जो वर्ष 2024 में 8.40 मीटर और वर्ष 2026 में 8.95 मीटर तक पहुंच चुका है।

शहर के अन्य निगरानी केंद्रों के आंकड़े भी राहत देने वाले नहीं हैं। राष्ट्रीय इंटर कालेज क्षेत्र बौलिया में भूजल स्तर 9.65 मीटर, राजकीय पालिटेक्निक क्षेत्र असुरन में 9.60 मीटर और राजकीय महिला पालिटेक्निक क्षेत्र असुरन में 8.80 मीटर नीचे दर्ज किया गया है। इन इलाकों में भी यदि भूजल रिचार्ज की व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है।

वर्षा के बाद भी नहीं भर पा रही जमीन की कोख
आम तौर पर मानसून के बाद भूजल स्तर में सुधार होना चाहिए, लेकिन गोरखपुर के कई हिस्सों में ऐसा नहीं हो रहा है। वर्ष 2023 में नौसड़ क्षेत्र में प्री-मानसून जलस्तर 6.05 मीटर था, जो वर्षा के बाद सुधरकर 3.35 मीटर तक आ गया था। लेकिन कई शहरी क्षेत्रों में वर्षा का पानी जमीन के भीतर पहुंच ही नहीं पा रहा है। इसका मुख्य कारण बड़ी संख्या में बनी पक्की सड़कें, इंटरलाकिंग, टाइल्स और सीमेंटेड सतहें हैं, जिनसे प्राकृतिक जल रिसाव बाधित हो रहा है।

इसके अलावा कभी तालाबों और पोखरों की बड़ी संख्या के लिए जाना जाने वाला शहर गोरखपुर में लगातार अतिक्रमण और निर्माण के कारण कई पारंपरिक जलस्रोत कमजोर हो गए हैं। इसके साथ ही घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सबमर्सिबल पंपों का बढ़ता इस्तेमाल भी भूजल पर दबाव बढ़ा रहा है। पानी की खपत बढ़ रही है, लेकिन उसके बराबर जमीन के भीतर पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रभावी बनाने की जरूरत
भूजल विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में शहर के कई हिस्सों में जल संकट गहरा सकता है। इसके लिए सरकारी और निजी भवनों में रूफ टाप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है। इसके अलावा पार्कों, खाली स्थानों और सार्वजनिक क्षेत्रों में रीचार्ज पिट और सोख्ता गड्ढों का निर्माण कराया जाना चाहिए, ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन के अंदर पहुंच सके।

जरूरत है कि नगर निगम, भूगर्भ जल विभाग और नागरिक मिलकर जल संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाएं। भूजल स्तर में लगातार गिरावट अब सिर्फ आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी है। अगर अभी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो गोरखपुर में भविष्य में पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

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