विकास खंड अछल्दा की ग्राम पंचायत हरचंदपुर के मजरा रामगढ़ स्थित झुकी हुई पानी की टंकी का ध्वस्तीकरण मंगलवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सकुशल पूरा कर लिया गया।
करीब 20 घंटे की मशक्कत के बाद हरियाणा से आई विशेषज्ञ टीम की निगरानी में टंकी को नियंत्रित तरीके से ध्वस्त किया गया। पूरे अभियान के दौरान आसपास के कई थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात रहा और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया।
ध्वस्तीकरण का कार्य रविवार को शुरू होना था, लेकिन आवश्यक उपकरण और बुलडोजर समय पर न पहुंचने के कारण पहले दिन काम शुरू नहीं हो सका। इसके बाद सोमवार से हैमर मशीन और अन्य भारी उपकरणों की सहायता से टंकी के पिलरों को काटने का कार्य शुरू किया गया।
सोमवार शाम तक तीन पिलर काट दिए गए थे। अंतिम पिलर को सावधानीपूर्वक काटकर मंगलवार को पूरी टंकी को सुरक्षित तरीके से जमींदोज कर दिया गया। ध्वस्तीकरण के दौरान टंकी के चारों ओर लगभग 100 मीटर के दायरे को पूरी तरह खाली करा दिया गया था।
बैरिकेडिंग कर आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के चलते ध्वस्तीकरण का कार्य बिना किसी अप्रिय घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
अवर अभियंता रविकांत प्रजापति ने बताया कि टंकी को ध्वस्त करने का ठेका नवीन कंस्ट्रक्शन को दिया गया था। ध्वस्तीकरण का कार्य आपरेटर सुशील कुमार सिंह की देखरेख में विशेषज्ञों के निर्देशन में पूरा कराया गया।
बताया कि अब स्थल का सर्वे कराया जाएगा, जिसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर नई पानी की टंकी के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
बताया कि नई टंकी बनने तक क्षेत्र में डायरेक्ट सप्लाई सिस्टम के माध्यम से पेयजल आपूर्ति जारी रखी जाएगी, ताकि ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े।
जांच में 56 सेंटीमीटर झुकी मिली टंकी
वर्ष 2011 में शुरू हुई हरचंदपुर ग्रामीण पेयजल योजना के तहत वर्ष 2013 में लगभग पौने तीन करोड़ रुपये की लागत से 15 मीटर ऊंची एवं 6.40 लाख लीटर क्षमता वाली इस टंकी का निर्माण कराया गया था। इस टंकी से करीब 35 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से कई गांवों में पेयजल आपूर्ति होती थी।
तकनीकी जांच में टंकी उत्तर-पूर्व दिशा की ओर 56 सेंटीमीटर झुकी मिलने के बाद विशेषज्ञों ने इसे असुरक्षित घोषित किया था, जिसके बाद जल निगम ने ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया।


