जिले में हिरणों की आबादी लगातार बढती जा रही है, मगर उनकी सुरक्षा व संरक्षण का कोई इंतजाम अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में वे जब वन्य क्षेत्र से भटकर कर आबादी में आते हैं तो कुतों के हमले में या तो उनकी मृत्यु हो जाती है या फिर वह गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं।
दो दशक पूर्व जिले के वन्य क्षेत्रों में हिरणाें का नामोनिशान नहीं था। वर्ष 2007 की वन्य जीव गणना में पहली बार चीतल प्रजाति के 39 हिरण जिले के वन्य क्षेत्र में पाए गए। 2007-08 में पहली बार बस्ती के लोगों को पता चला कि जिले में हिरण की भी मौजूदगी है।
तीन साल में हिरणों की आबादी तेजी से बढ़ी और 2010-11 में जब वन्य जीव गणना कराई गई तो चीतल प्रजाति के हिरणों की संख्या 104 तक पहुंच गई। हिरणों की आबादी तेजी से बढ़ती गई। इसके बाद वर्ष 2013-14 में वन्य जीवों की गणना कराई गई तो इनकी संख्या 225 पहुंच गई। इनमें नेपाल के जंगलो से भटकर कर आए हिरण की दो अन्य प्रजाति के मेहमान चिंकारा और पाढा भी शामिल हो गए।
रामनगर रेंज में 32 चिंकारा और पांच पाढा प्रजाति के हिरण मिलना वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर थी। इसके बाद कुछ बारहसिंघा प्रजाति के हिरण भी रामनगर रेंज में देखे गए। 2016-17 में जब वन्यजीव गणना हुई तो जिले में हिरण की एक अन्य प्रजाति सांभर की भी मौजूदगी दर्ज हुई।
वन्य जीवन गणना के अनुसार कुल 406 हिरण पाए गए, जिनमें सांभर प्रजाति के छह चीतल के 94, बारहसिंघा के 136 व पाढा प्रजाति के 170 हिरण शामिल थे। इसके बाद वन्यजीव गणना वर्ष 2022-23 में कराई गई।
वर्ष 2022-23 की वन्य जीव गणना में हिरणों का विवरण
| सांभर | 101 |
| चीतल | 677 |
| पाढा | 532 |
| बारहसिंघा | 87 |
यहां अधिकतर पाए जाते हैं हिरण
सरयू नदी के किनारे दुबौलिया, कलवारी, विक्रमजोत, कुआनो नदी के किनारे गनेशपुर, बंधुआ, डमरुआ जंगल, सिक्टा, अंधेड़ी, बाघाकांडर, मिश्रौलिया, गौरा घाट डड़वारे, बैजीपुरवा,औड़जंगल, अजगैवा जंगल, शिवाघाट, महदेवा,अटरा, बाराह छत्तर,मनाेरमा नदी के किनारे,नाऊडाड़, निरंजनपुर, सोंधिया घाट, रवई नदी के किनारे बसहवा, मरहा, कोईलपुरा, चितरगड़िया, रैकवार, कटरा बुजुर्ग आदि ग्राम पंचायतों के पास हिरण पाए जा रहे हैं। नदी कि किनारे और उसके आसपास का इलाका हिरणों को खूब भा रहा है। यह वन्य क्षेत्रों के अलावा गन्ना और गेहूं,धान के खेतों में भी रहते हैं।
पानी व भोजन की तलाश में आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं हिरण
हिरण अक्सर भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में पहुच जा रहे हैं। जैसे ही वह पहुंचते हैं उन पर कुत्तों का झुंड हमला कर दे रहा है। इसमें किसी की जान चली जा रही है तो कोई गंभीर रूप से घायल हो रहा है। कई बार तो यह सड़क पार करते वाहनों की चपेट में आ जा रहे हैं। हाल ही में गनेशपुर, डमरुआ, सल्टौआ के पास कुत्तों के हमले में हिरण घायल हो चुके हैं।


