रेलवे में अब ‘नो इंग्लिश’: हिंदी में काम करेंगे अफसर-कर्मचारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

 रेलवे में अधिकारियों व कर्मियों को हिंदी में काम करने को कहा जाता है। इसे अधिकारी व उनके नेतृत्व में काम करने वाले अन्य कर्मी नजरअंदाज कर देते हैं। अब इस तरह की लापरवाही नहीं चलेगी।

उत्तर रेलवे में हिंदी में काम अनिवार्य

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडेय ने सभी कार्यालयों में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप हिंदी में कार्य सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने विभागीय निरीक्षणों के दौरान राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति का भी निरीक्षण करें तथा उसका उल्लेख अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में अनिवार्य रूप से करें।

क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित हुई। उन्होंने सभी कार्यालयों के प्रमुखों को संसदीय राजभाषा समिति के निरीक्षण के दौरान स्वयं उपस्थित रहने कहा है।

संसदीय समिति के सवाल से बचने को तैयारी

संसदीय राजभाषा समिति की निरीक्षण प्रश्नावली सावधानीपूर्वक एवं पूर्ण रूप से भरने तथा निरीक्षण के दौरान समिति द्वारा दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की बैठकों में कार्यालय प्रमुखों को नियमित रूप से उपस्थित होने का भी निर्देश दिया है।

GM खुद करेंगे निरीक्षण

महाप्रबंधक ने उत्तर रेलवे की राजभाषा ई-पत्रिका‘सरस्वती संगम’के वर्ष 2026 के प्रथम अंक का विमोचन किया गया। मुख्य राजभाषा अधिकारी शिल्पी अग्रवाल ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं हिंदी में कार्य करें तथा अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मियों को भी हिंदी में कार्य करने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने संसदीय राजभाषा समिति द्वारा किए जा रहे निरीक्षणों की जानकारी देते हुए सभी सदस्यों से अपने-अपने कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। बैठक में उत्तर रेलवे के सभी प्रमुख मुख्य विभागाध्यक्ष, मंडलों के अपर मंडल रेल प्रबंधक तथा कारखानों से मुख्य कारखाना प्रबंधक शामिल हुए। उपमहाप्रबंधक पुनीत सिंह ने बैठक का संचालन किया।

 

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