क्लासरूम की सीख से तय होगी भविष्य की रणनीति, साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों के नए दौर में यूपी

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को एक नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष (क्लासरूम) में होने वाले वास्तविक अधिगम (सीखने की प्रक्रिया) को अपनी नई शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। राज्य में पहली बार शिक्षकों के जमीनी अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष और निपुण भारत मिशन की सफलताओं को एक मंच पर लाकर भविष्य का शैक्षणिक खाका खींचा गया है।

बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ में नीति-निर्माताओं से लेकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने हिस्सा लिया। अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस उच्च स्तरीय मंथन में ‘टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025’ का विमोचन किया गया, जो आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा तय करेगी।

क्लासरूम की हकीकत बयां करता साक्ष्य-आधारित दस्तावेज

कार्यक्रम के दौरान जारी की गई टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे -2025 की रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह रिपोर्ट कागजी दावों से इतर क्लासरूम के भीतर के वास्तविक बदलावों का दस्तावेज है। यह सर्वे नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर और बरेली के 200 विद्यालयों में व्यापक स्तर पर किया गया। इसमें कक्षा 1 और 2 में भाषा व गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, क्लासरूम का माहौल, पाठ योजना, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षण समय के सही उपयोग का बारीकी से विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट साफ करती है कि शिक्षा सुधारों की असली सफलता वही है जो बच्चों के सीखने के स्तर और उनके व्यवहार में दिखाई दे। यह डेटा अब भविष्य की रणनीतियों को अधिक परिणामोन्मुख बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 और प्रभावी शिक्षण के नए आयाम

प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की अब तक की प्रगति का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग की आगामी कार्ययोजना को सामने रखा, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं।

  1. 10 प्रभावी शिक्षण अभ्यास: कक्षा के भीतर पढ़ाने की पद्धतियों को अधिक आधुनिक और रोचक बनाना।

  2. 15 कैच-अप रणनीतियां: जो बच्चे सीखने की दौड़ में पीछे छूट गए हैं, उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए विशेष कार्ययोजना।

  3. हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड व अकादमिक कैलेंडर: बच्चों के सर्वांगीण विकास का व्यवस्थित मूल्यांकन।

जिज्ञासापूर्ण वातावरण और भयमुक्त शिक्षा पर मंथन

‘स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के भीतर से प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर किया जाना चाहिए। नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे।

इस चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के बीईओ राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी और बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने सफल जमीनी प्रयोगों को साझा किया।

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