विक्रमशिला सेतु का बड़ा हिस्सा रविवार देर रात गंगा में समा गया, जिससे भागलपुर और पूर्व-उत्तर बिहार के बीच आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है।
रात 12:50 बजे गंगा में समाया 34 मीटर हिस्सा
रविवार रात करीब 11:50 बजे पुल को नुकसान पहुंचने की सूचना के बाद दोनों ओर से आवागमन रोक दिया गया था। जांच चल ही रही थी कि पोल संख्या 133 के पास लगभग 34 मीटर लंबा हिस्सा अचानक टूटकर रात 12:50 बजे गंगा नदी में समा गया।
बड़ा हादसा टला, समय रहते रोका गया ट्रैफिक
गनीमत रही कि समय रहते यातायात बंद कर दिया गया था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि पुल के दो हिस्सों में बंट जाने से आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
नाव और जहाज से शुरू हुई आवाजाही
स्थिति को देखते हुए गंगा के विभिन्न घाटों पर नाव और बड़े जहाजों का परिचालन शुरू कर दिया गया है। बाबूपुर घाट और बरारी घाट से उस पार जाने के लिए नावें चलाई जा रही हैं। सुबह से ही बड़ी संख्या में यात्री घाटों पर पहुंचने लगे हैं।
प्रशासन की निगरानी में चल रहा संचालन
डीएम नवल किशोर चौधरी ने बताया कि नाव संचालन के लिए मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है और पूरी व्यवस्था नियमों के अनुसार की जा रही है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।
किराया तय, लोगों को राहत
सूत्रों के अनुसार मोटरसाइकिल का किराया करीब 50 रुपये और व्यक्ति का किराया 20 रुपये तय किया गया है। वैकल्पिक व्यवस्था शुरू होने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन पुल टूटने से दैनिक आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
लोगों की बढ़ी मुश्किलें
पुल बंद होने के बाद पूर्व और उत्तर बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने तक नाव और जहाज ही मुख्य विकल्प रहेंगे।


