मोतिहारी में सुगर मिल की आड़ में माफियाओं ने बेच डाली गैर-मजरुआ जमीन, नए DM के एक्शन से मचा हड़कंप

मोतिहारी स्थित हनुमान सुगर मिल की जमीन को सिलिंग से मुक्त करते हुए उसकी खरीद-बिक्री के लिए रोक सूची से हटाने के दौरान जिला स्तर के हाकिमों ने शहर से सटे इलाके में स्थित सदर अंचल के बैरिया मौजा स्थित खाता-109 (गैर-मजरुआ) जमीन को भी बेचने की इजाजत दे दी। यानी उसे भी रोक सूची से हटा दिया गया।

इस सिलसिले में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रोक सूची से कई खाता को मुक्त करने के लिए प्राप्त प्रस्ताव व न्यायिक आदेश पर फैसला लिया। इसी सूची में खाता 109 के चार खेसरा क्रमश: 523, 38, 47 व 40 को रोक सूची से मुक्त करते हुए जिला निबंधन कार्यालय को पत्र भेज दिया गया।

पत्र 12 दिसंबर 2025 को भेजा गया तब से जमीन की खरीद बिक्री हो रही थी। परिमार्जन भी हुआ। दावा यह भी है कि रोक सूची से जमीन को हटाने के लिए अंचल कार्यालय से रिपोर्ट भी नहीं ली गई थी।

इस बीच पूर्वी चंपारण के नए जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव को जब मामले की जानकारी लगी तो उन्होंने परिमार्जन करने वाले सदर अंचल के कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इन सबके बीच सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब एडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सबकुछ साफ कर दिया तो फिर कर्मचारी की क्या बिसात की वो हाकिमों के फैसलों पर कोई बात करे।

इस तरह से देखते-देखते करीब सौ कट्ठे से अधिक गैर-मजरुआ जमीन बिक गई। हालांकि, अभी इसपर जांच होनी है। बताते हैं कि कर्मचारी के स्तर पर कुछ मामलों में अड़चन यह कहकर पैदा किया गया कि 109 खाता की जमीन गैर-मजरुआ है। इन सबके बीच वरीय अधिकारियों के फैसले वाली चिट्ठी दौड़ती रही और माफिया अपना काम करते चले गए।

सूत्र बताते हैं, दरअसल उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में हनुमान सुगर मिल की जमीन को सिलिंग से हटाने का आदेश 16 मई 2025 को जारी किया गया। आदेश सीडब्ल्यू जेसी नंबर 13711/2024 हर्षवर्धन बहेती बनाम बिहार राज्य में जारी किया गया था।

इसी आदेश के आलोक में कमेटी जब रोक सूची पर पुनर्विचार करने बैठी तो खाता 109 भी चीनी मिल की जमीन के संबंधित खातों के बीच में घुसाकर मुक्त कर दिया गया। फिर देखते-देखते गैर-मजरुआ जमीन भी बिक गई। अब नए जिलाधिकारी ने पहली कार्रवाई की है। इसके बाद इस खेल में शामिल सभी लोगों के बीच हड़कंप मचा है।

प्रशासनिक तंत्र में सेंध लगाकर भूमि माफियाओं ने किया 50 करोड़ से अधिक का धंधा

सूत्र बताते हैं कि भूमि माफियाओं के इशारे पर बड़ी डीलिंग के बाद इस खाता को मुक्त किया गया। 109 खाता के चार खेसरा में करीब 100 कट्ठे जमीन की खरीद-बिक्री की बात सामने आ रही है। अब इसका मिलान जिला निबंधन कार्यालय की संचिका से किया जाना है। जिन लोगों ने जमीन खरीदी है उनका दाखिल-खारिज नहीं हुआ है।

अब जमीन खरीदकर जिन लोगों ने घर बना लिया है, उनके सामने कई समस्या एक साथ खड़ी हो गई है। कारण यह कि माफियाओं ने एडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी जिसमें अंचल अधिकारी, जिला निबंधन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी व भूमि सुधार उप समाहर्ता सदस्य हैं की ओर से जारी कागज दिखाया।

इन सबके बीच अब जबकि डीएम ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है तो इस खेल के खिलाड़ियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं।

कुछ भी बताने से बच रहे जिम्मेदार

मामले में अपर समाहर्ता से जब वॉट्सएप संदेश के जरिए सवाल पूछे गए तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बताने से परहेज किया। बावजूद इसके कि जमीन से रोक हटाने संबंधी कमेटी को लीड वो ही कर रहे थे।

जिलाधिकारी ने कहा- करेंगे पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा

इस पूरे प्रकरण की बाबत पूछे जाने पर जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने बताया कि विषय गंभीर है। वो स्वयं इस मामले की समीक्षा करेंगे। बताते हैं कि प्रारंभिक तौर पर परिमार्जन के मामले में कार्रवाई की गई है। आगे अभी विस्तृत समीक्षा में किन स्तरों पर गड़बड़ी की गई है पूरी बात सामने आएगी।

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