आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाएगी। इसी कड़ी में ज्येष्ठ पूर्णिमा को पारंपरिक और हर्षोल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ स्वामी की भव्य स्नान यात्रा आयोजित की गई। इसके साथ ही रथयात्रा का अनुष्ठान भी प्रारंभ हो गया है।
मंदिरों में हुआ महाप्रभु का महास्नान
शहर के नया बाजार सखीचंद घाट स्थित जगन्नाथ मंदिर, गिरधारी साह हाट जगन्नाथ मंदिर और बाटा गली के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को पूरे विधि-विधान से महास्नान कराया गया। इस महास्नान को देखने के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
15 दिनों तक एकांतवास में रहेंगे भगवान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ (बीमार) हो जाते हैं। इस वजह से अगले 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ एकांतवास (अनासार) में रहेंगे। इस दौरान मुख्य गर्भगृह से हटाकर मूर्तियों को स्नान मंडप में ही रखा जाएगा, जहां उनका विशेष उपचार होगा।
जड़ी-बूटियों के काढ़े का लगेगा भोग
बीमारी की इस अवधि में आम भक्तों के लिए भगवान के दर्शन पूरी तरह से बंद रहेंगे। एकांतवास के दौरान भगवान को केवल विशेष जड़ी-बूटियों के काढ़े और सात्विक पथ्य का ही भोग लगाया जाएगा। माना जाता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ 33 कोटि देवी-देवताओं के साथ अदृश्य रूप में स्नान करते हैं।
हरिद्वार और पुरी से मंगाया गया जल
सखीचंद घाट जगन्नाथ मंदिर के सेबायत पंडित समीर कुमार मिश्र और पुजारी सौरभ कुमार मिश्रा ने बताया कि भगवान का सहस्त्रधारा स्नान कराया गया है। इसके लिए बूढ़ानाथ गंगा तट, सरयू नदी, हरिद्वार की गंगा और पुरी (ओडिशा) के समुद्र जल को विशेष रूप से मंगाया गया था, जिससे अभिषेक संपन्न हुआ।
108 घड़ों के औषधीय जल से अभिषेक
महास्नान के इस पवित्र जल में हल्दी, सुंगधित इत्र और विशेष जड़ी-बूटियों को मिलाकर 108 घड़ों से भगवान का अभिषेक 11 ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। पुराणों के अनुसार, यह विशेष दिन प्रभु का प्राकट्य दिवस (जन्मदिन) भी माना जाता है, जिसका सनातन धर्म में बड़ा महत्व है।
16 जुलाई को होगा भव्य समापन
भगवान जगन्नाथ की यह महा रथयात्रा भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित होती है। इस वर्ष रथयात्रा की शुरुआत स्नान यात्रा के साथ हो चुकी है, जबकि इसका भव्य समापन 16 जुलाई को किया जाएगा। मान्यता है कि रथ पर सवार भगवान के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

