गुजरात में 83 लाख से ज्यादा बच्चों के लिए पल्स पोलियो अभियान शुरू, सीएम भूपेंद्र पटेल ने दवा पिलाकर कैंपेन की शुरुआत की

 मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रविवार को गांधीनगर में बच्चों को पोलियो की दवा की बूंदें पिलाकर गुजरात में राज्यव्यापी पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का मकसद राज्य भर में पांच साल से कम उम्र के 83.49 लाख से ज़्यादा बच्चों को कवर करना है।

पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे इस अभियान को गुजरात भर में 32,997 पोलियो बूथों के जरिए लागू किया जाएगा। बच्चों को वैक्सीन देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के 6,599 सुपरवाइजर की देखरेख में कुल 65,994 हेल्थ टीमें तैनात की गई हैं।

तय बूथों पर किया गया टीकाकरण

राज्य में 28 जून को पोलियो संडे मनाया गया और तय बूथों पर टीकाकरण किया गया। यह अभियान 29 और 30 जून को भी जारी रहेगा। इन दिनों हेल्थ वर्कर घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि 0 से 5 साल की उम्र के जिन बच्चों को बूथ पर टीका नहीं लग पाया था, उन्हें ओरल पोलियो वैक्सीन मिल जाए।

अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री पटेल ने स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया की मौजूदगी में बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाईं और इस तरह पूरे राज्य में टीकाकरण अभियान का प्रतीकात्मक रूप से उद्घाटन किया।

तीन दिनों तक चलेगा अभियान

पानशेरिया ने बताया, “आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में पोलियो टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। 0 से 5 साल की उम्र के सभी बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाई जाएंगी। यह अभियान तीन दिनों तक चलेगा।” राज्य सरकार के अनुसार, इस अभियान का मकसद राष्ट्रीय पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तहत गुजरात की कोशिशों को जारी रखना है ताकि यह पक्का किया जा सके कि हर पात्र बच्चे को टीका लगे।

सिर्फ़ गांधीनगर जिले में ‘पल्स पोलियो नेशनल इम्यूनाइजेशन कैंपेन’ के तहत 1.58 लाख से ज्यादा बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। यह अभियान जिले भर में बनाए गए 746 वैक्सीनेशन बूथों के बड़े नेटवर्क के जरिए चलाया जाएगा।

दूर-दराज के इलाकों और ऐसी जगहों पर रहने वाले बच्चों तक पहुंचने के लिए 103 मोबाइल टीमें तैनात की जाएंगी। ये टीमें ईंट-भट्टों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और ऐसी दूसरी जगहों पर जाएंगी जहां स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से नहीं पहुंच पातीं।

इसके अलावा, यात्रा कर रहे या रास्ते में मौजूद बच्चों को टीका लगाने के लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर पांच ट्रांजिट टीमें काम करेंगी। इस अभियान में कुल 3,167 हेल्थ वर्कर शामिल होंगे जो वैक्सीन लगाने और उसकी देखरेख का काम करेंगे। वे बूथों, मोबाइल यूनिट्स और ट्रांजिट पॉइंट्स के बीच तालमेल बनाए रखेंगे।

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