क्या यह प्रधानमंत्री का आदेश है? मोबाइल विवाद के बाद धनबाद भाजपा में बवाल, महानगर उपाध्यक्ष हटाए गए

भारतीय जनता पार्टी द्वारा कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से मजबूत करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और संगठनात्मक अनुशासन का पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ के दौरान धनबाद में ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने पार्टी के भीतर जारी अंतर्कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया।

धनबाद में भाजपा के ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ के दौरान शुरू हुआ एक छोटा विवाद अब संगठनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया है। 23 और 24 मई को आयोजित प्रशिक्षण शिविर में मोबाइल फोन को लेकर हुई बहस ने पार्टी के भीतर की गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया।

धनबाद भाजपा महानगर के उपाध्यक्ष धनेश्वर महतो को अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटा दिया गया है। महानगर अध्यक्ष श्रवण राय ने उन्हें नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा था। जवाब मिलने के बाद भी नेतृत्व संतुष्ट नहीं हुआ और तत्काल प्रभाव से उन्हें उपाध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया।

संगठन महामंत्री के निर्देश पर बढ़ा मामला

प्रशिक्षण शिविर में झारखंड भाजपा के संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह का संबोधन होना था। कार्यक्रम शुरू होने से पहले महानगर भाजपा के महामंत्री मानस प्रसून ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मोबाइल फोन बाहर रखने का आग्रह किया। इसे कर्मवीर सिंह का निर्देश बताया गया।

इसी दौरान धनबाद महानगर भाजपा के उपाध्यक्ष धनेश्वर महतो ने मोबाइल बाहर रखने से इनकार कर दिया। बताया जाता है कि उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “क्या यह प्रधानमंत्री का आदेश है?” इसी बात को लेकर मानस प्रसून और धनेश्वर महतो के बीच तीखी बहस हो गई।

समर्थकों के साथ शिविर छोड़कर निकले

बहस बढ़ने के बाद धनेश्वर महतो अपने समर्थकों के साथ प्रशिक्षण शिविर से बाहर निकल गए। मामले की जानकारी संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह तक पहुंची, जिसके बाद इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई का निर्देश भी वहीं से दिया गया।

सांसद ने की मामले को सलटाने की कोशिश

धनेश्वर महतो को धनबाद सांसद ढुलू महतो का करीबी माना जाता है। बताया जाता है कि सांसद को जब विवाद की जानकारी मिली तो उन्होंने धनेश्वर महतो को फटकार लगाई और अगले दिन शिविर में शामिल होने को कहा। इसके बाद धनेश्वर महतो अगले दिन शिविर में पहुंचे भी, लेकिन तब तक मामला संगठन स्तर पर तूल पकड़ चुका था।

जिलाध्यक्ष बोले-अनुशासन सर्वोपरि

धनबाद महानगर अध्यक्ष श्रवण राय ने कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं से बहस और संगठनात्मक निर्देशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

धनेश्वर महतो ने बताया एकतरफा फैसला

वहीं धनेश्वर महतो ने कार्रवाई को राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताया है। उनका कहना है कि जिला कमेटी के किसी पदाधिकारी को हटाने का अधिकार केवल प्रदेश नेतृत्व को है। उन्होंने निष्पक्ष जांच के बिना कार्रवाई किए जाने पर सवाल उठाए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद धनबाद भाजपा की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद संगठन के भीतर और बड़ा असर छोड़ सकता है।प्रशिक्षण शिविर से अनुशासन का संदेश निकलने के बजाय विवाद और कार्रवाई की चर्चा अधिक होने लगी है।

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