मुहर्रम की दसवीं की रात शहर में सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिला। विभिन्न मोहल्लों से निकले मुहर्रम अखाड़ा जुलूस के दौरान हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए भाईचारे का संदेश दिया।
इस दौरान ‘हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद’ के नारों से माहौल गूंजता रहा। पैगाम-ए-इंसानियत के जिलाध्यक्ष एवं शांति समिति सदस्य मो. शाहनवाज रहमान उर्फ सल्लू खान ने अपनी टीम के साथ गंज मोहल्ला स्थित गंगाजी-शंकरजी, काली क्लब मंदिर, महावीर मंदिर, धर्मशाला स्थित गणेश मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की।
सल्लू खान ने कहा कि कुछ लोग समाज को बांटने का प्रयास करते हैं, लेकिन औरंगाबाद की पहचान हमेशा आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द की रही है। सभी धर्मों का सम्मान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
समाजसेवी के इस प्रयास की सराहना मां दुर्गा मंदिर समिति के अध्यक्ष पंकज वर्मा, गणेश मंदिर के पुजारी मनीष पांडेय, संकट मोचन मंदिर के अजय पांडेय सहित अन्य लोगों ने की।
जुलूस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा, नगर अंचल इंस्पेक्टर फहीम आजाद खान, सब इंस्पेक्टर अनित कुमार, प्रदीप कुमार, गोपाल कुमार, समीर कुमार सिंह, प्रवीण कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। नगर थानाध्यक्ष स्वयं देर रात तक जुलूस की निगरानी करते रहे।
वार्ड पार्षद सिकंदर हयात, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रईस आजम खान, साबिर खान, औरंगजेब खान, अब्दुल्ला, राजा कालिया पठान, जियाउद्दीन खान, महताब खान, मो. जमाल, राजा खान, निजामुद्दीन खान, छोटे खान, मो. आसिफ सहित बड़ी संख्या में दोनों समुदायों के लोग उपस्थित रहे।


