‘ब्रह्मोस’ की बढ़ती डिमांड, अब इस मुस्लिम देश को चाहिए भारत से यह मारक मिसाइल; साथ में ‘आकाशतीर’ भी

 मई 2025 में जब भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर अटैक कर पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया था तो भारतीय सेना के सटीक हमलों और स्वदेशी हथियारों के कौशल से पूरी दुनिया हैरान हो उठी थी। भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) की काफी चर्चा और अहम भूमिका रही। आलम यह रहा कि कुछ देशों से इस मिसाइल की डिमांड आने लगी।

अब खबर है कि भारत सरकार UAE को अपने कुछ प्रमुख डिफेंस सिस्टम बेचने के लिए बातचीत कर रही है, जिनमें सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ भी शामिल है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में 4 भारतीय सूत्रों ने यह दावा किया है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद खाड़ी देश हथियारों की खरीद बढ़ा रहा है।

सूत्रों ने और क्या कहा?

इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि जिन चर्चाओं की पहले कोई खबर नहीं आई थी, उनमें भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ‘आकाशतीर’ की संभावित बिक्री भी शामिल है।

इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक तीसरे सूत्र ने कहा, “UAE ने ब्रह्मोस और आकाशतीर समेत हमारे कई हथियार सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई है। भारत और UAE के बीच बातचीत शुरुआती दौर में है और तेज़ी से आगे बढ़ रही है।” हालांकि, भारतीय अधिकारियों और UAE के विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया।

क्यों खास है ब्रह्मोस मिसाइल

भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाई गई ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में से एक है और इसे ज़मीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है, जबकि आकाशतीर एक पूरी तरह से ऑटोमेटेड एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे भारत की सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारतीय सेना ने मिलकर बनाया है।

प्रोजेक्ट ‘आकाशतीर’ भारतीय सेना का एक अत्याधुनिक, ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम है, इसे रक्षा मंत्रालय के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक (आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत) से विकसित किया गया है।

ईरान युद्ध के बाद किस तैयारी में UAE

युद्ध के दौरान ईरान के ज़बरदस्त हमले के बाद और नए खतरों से निपटने की अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए, UAE भारत और दूसरे स्रोतों से रक्षा उपकरण खरीदने पर विचार कर रहा है। उसे होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी करनी है, जो उसके ऊर्जा निर्यात के लिए एक बहुत ज़रूरी रास्ता है।

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