उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और लोक परंपरा का प्रतीक ऐतिहासिक मौण मेला शनिवार को टिहरी गढ़वाल के जौनपुर क्षेत्र की अगलाड़ नदी में बेहद उत्साहपूर्वक मनाया गया।
इस अनूठे पारंपरिक मेले में जौनपुर, जौनसार, उत्तरकाशी और मसूरी समेत कई क्षेत्रों के 20 हजार से अधिक ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। एक अनुमान के मुताबिक, इस दौरान नदी से लगभग 15,000 किलोग्राम (15 क्विंटल) मछलियां पकड़ी गईं।
टिमरू पाउडर डालते ही शुरू हुआ मछली पकड़ने का रोमांच
मौण मेला विकास समिति के अध्यक्ष महिपाल सजवाण ने बताया कि शनिवार दोपहर ठीक एक बजे अगलाड़ नदी के ‘मौण कोट’ नामक स्थान से पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने का सिलसिला शुरू हुआ।
सभी ‘पानत्तीदारों’ की मौजूदगी में नदी के पानी में औषधीय गुणों से भरपूर टिमरू के पेड़ की छाल का पाउडर डाला गया।
टिमरू पाउडर के पानी में मिलते ही मछलियां अचेत हो गईं। जिसके बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक बर्तनों और जालों की मदद से उन्हें पकड़ना शुरू किया।
4 किमी तक चला मेला
मौण कोट से शुरू हुआ यह रोमांचक सिलसिला करीब चार किलोमीटर आगे अगलाड़ और यमुना नदी के संगम तक जारी रहा।
क्षेत्रों से उमड़ी भारी भीड़
इस पारंपरिक उत्सव का हिस्सा बनने के लिए टिहरी गढ़वाल जिले के जौनपुर विकासखंड के अलावा जौनसार-बावर, उत्तरकाशी जिले के गोड़र खटल, मसूरी और विकासनगर से 20,000 से अधिक लोग पहुंचे थे।
हर साल जून माह के अंतिम सप्ताह में यमुना की सहायक अगलाड़ नदी में आयोजित होने वाला यह मेला आपसी भाईचारे और प्रकृति से जुड़ाव का अनूठा उदाहरण है।
शांतिपूर्ण संपन्न हुआ मेला
चूंकि मेले में हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है, इसलिए जिला प्रशासन टिहरी की ओर से सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। नदी के तटों और मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।


