कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) एक जुलाई से नई केंद्रीयकृत डिजिटल प्रणाली लागू करने जा रहा है। इससे नोएडा के करीब नौ लाख पीएफ खाताधारकों को बड़ा फायदा मिलेगा। अब आवेदन करते समय ही स्क्रीन पर यह पता चल जाएगा कि कर्मचारी अग्रिम निकासी के लिए पात्र है या नहीं। इससे गलत आवेदन कम होंगे और दावों के निस्तारण में तेजी आएगी।
ईपीएफओ की नई केंद्रीयकृत डिजिटल प्रणाली (सीडीएस) पूरे देश में एक जुलाई से लागू होगी। नई व्यवस्था के तहत पीएफ खाताधारकों को आवेदन करते समय ही उनकी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और संभावित त्रुटियों की जानकारी मिल जाएगी। इससे गलत श्रेणी में किए जाने वाले आवेदन रुकेंगे और दावे खारिज होने की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त प्रथम सुयश पांडे ने बताया कि वर्तमान में नोएडा क्षेत्र में करीब 20 प्रतिशत पीएफ दावे केवल गलत आवेदन या तकनीकी त्रुटियों के कारण अस्वीकार हो जाते ह। नई प्रणाली आवेदन जमा करने से पहले ही कमियों को चिन्हित कर देगी, जिससे कर्मचारियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।
देश के किसी भी कोने में निकाल सकेंगे राशि
नई व्यवस्था में पीएफ अग्रिम निकासी के लिए पहले जहां 13 अलग-अलग कारण निर्धारित थे, अब उन्हें घटाकर तीन श्रेणियों—घर से जुड़ी आवश्यकता, बुनियादी जरूरत और विशेष आवश्यकता में शामिल किया गया है। इससे कर्मचारियों के लिए सही विकल्प चुनना आसान होगा। इसके अलावा अब कर्मचारी देश के किसी भी हिस्से से ईपीएफओ की वेबसाइट या उमंग एप के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय में संसाधित किया जा सकेगा।
आवेदन अवधि का ब्याज भी सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा
अग्रिम निकासी की राशि के साथ आवेदन अवधि का ब्याज भी सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा। नोएडा में करीब नौ लाख सक्रिय पीएफ खाताधारकों को इस नई व्यवस्था का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ईपीएफओ का मानना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से दावों के निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रक्रिया तेज होगी और कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।


