पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नशे के खिलाफ तीखा संदेश देते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासन के संरक्षण के बिना नशे का धंधा 10 दिन भी नहीं चल सकता।
जब प्रशासक ने यह बात कही उस समय डीआईजी और एसपी भी मौजूद थे। अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस पर शनिवार को नगर निगम के विशेष सदन में करीब 36 मिनट के संबोधन में प्रशासक ने पुलिस व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी पर खुलकर बात की।
प्रशासक ने स्पष्ट कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब इसे जनआंदोलन बनाया जाए। केवल सरकार या पुलिस के भरोसे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने पार्षदों से कहा कि अपने-अपने वार्ड में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें और आंखें मूंदकर न बैठें।
उन्होंने कहा कि हर कोई चाहता है कि शहीद भगत सिंह पड़ोसी के घर पैदा हों, लेकिन समाज बदलने के लिए जिम्मेदारी खुद भी उठानी होगी। परिणाम आने में समय लग सकता है, लेकिन प्रयास शुरू होना चाहिए।’ प्रशासक ने कहा कि नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी लड़ाई स्कूलों और कॉलेजों से शुरू होगी।
माताओ और बहनों ने कहा कि नशे से बचा लीजिए
उन्होंने अपने सीमावर्ती जिलों के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां माताओं और बहनों ने केवल एक ही गुहार लगाई कि हमारे बच्चों को नशे से बचा लीजिए। एक मां ने उन्हें बताया कि उसका बेटा नशे की लत में घर का सामान बेच देता है और परिवार पर हाथ तक उठा देता है। यह किसी एक घर की नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की पीड़ा है।
कटारिया ने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स, नशीली गोलियां और इंजेक्शन नई चुनौती बन चुके हैं। इसलिए दवा विक्रेताओं और स्वास्थ्य संस्थानों को भी पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र केवल इलाज तक सीमित न रहें, बल्कि युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से भी जोड़ें, ताकि वे दोबारा नशे की ओर न लौटें।


