गुरुवार रात उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उपजे तनाव का असल कारण विगत 16 जून को कर्णप्रयाग में हुआ एक विवाद था। जिसके बाद कर्णप्रयाग, नगरासू और देहरादून शहर छावनी में तब्दील करने पड़े।
दरअसल, हेमकुंड यात्रा पर जा रहे चार निहंगों का ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर कर्णप्रयाग में भारतीय स्टेट बैंक के समीप वाहन पार्किंग को लेकर स्थानीय होटल संचालक से विवाद हो गया था।
विवाद बढ़ा और निहंगों ने तलवारें निकालीं
होटल संचालक प्रकाश रावत दोपहिया वाहन से अपने होटल के सामने पहुंचे। वाहन पार्क करते समय पहले से खड़े चार निहंगों के वाहन से उनका दोपहिया वाहन छू गया। इस पर निहंग उनसे उलझने लगे। दोनों में विवाद होता देख लोग एकत्र हो गए।
विवाद बढ़ गया और निहंगों ने तलवारें निकाल लीं। स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचे और विरोध किया। निहंगों ने स्थानीय लोगों पर तलवारों से हमला कर दिया। प्रकाश रावत बुरी तरह से लहूलुहान होकर सड़क पर गिर गए।
तलवार लहराते रहे बेखौफ निहंग
आक्रामक अंदाज में तलवार लहराते निहंग बेखौफ स्थानीय लोगों पर वार करते रहे। तीन लोग गजपाल सिंह (50) पुत्र बहादुर सिंह निवासी नैनीसैंण कंडारा, सुदर्शन कंडारी (55) पुत्र भजन सिंह कंडारी नैनीसैंण कंडारा और हरेन्द्र सिंह पंवार (42) पुत्र चंद्र सिंह पंवार बीच-बचाव और निहंगों के साथ हुई झड़प में घायल हो गए।
वहीं एक निहंग मनप्रीत सिंह (21) पुत्र सोमराज निवासी मोहाली, पंजाब भी पैर में चोट लगने से घायल हो गया। इसके बाद तीन निहंग बाइक से गौचर की तरफ फरार हो गए, जबकि एक निहंग जख्मी होने के कारण पकड़ा गया।
निहंगों के हमले से गुस्साए लोगों ने तीन घंटे तक हाईवे पर जाम लगाया और कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद निहंगों को अरेस्ट कर लिया गया।


