केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए सभी तरह के अनाजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित कर दिया है। मक्का के लिए यह 2410 रुपये प्रति क्विंटल है। बोनस अलग है।
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी पर राज्य सरकारें मक्का खरीदती है लेकिन झारखंड में धान व गेहूं को छोड़ अन्य फसलों की खरीद नहीं होती। इस वजह से किसानों को नुकसान हो रहा है। यहां के किसान 1700 से लेकर 2000 रुपया प्रति क्विंटल तक मक्का इसे बेच रहे हैं। किसानों को 400 से 700 रुपया प्रति क्विंटल नुकसान हो रहा है।
व्यापारी मक्का को मशीन से मापकर राशि तय करते हैं तथा ट्रैक्टर व ट्रक में लादकर बिहार के पीरपैंती रैक लोडिंग प्वाइंट तक पहुंचाते हैं। कुछ व्यापारी इसे सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल भी भेजते हैं।
गंंगा के तटीय क्षेत्र में करीब 4000 एकड़ में होती खेती
साहिबगंज जिले के गंगा तटीय क्षेत्रों में करीब 4000 एकड़ में मक्का की खेती होती है। मक्का इतना अधिक होता है कि किसान बेचने को मजबूर है। जिला में अनाज को रखने के लिए गोदाम नहीं है कि कुछ दिन रख दिया जाए तो बाजार में अच्छा दाम मिल जाता।
गौरतलब है कि सदर प्रखंड के गंगा किनारे मक्के की खेती वृहत पैमाने पर होती है। खासकर किसन प्रसाद,लालबथानी,उत्तरी व दक्षिणी मखमलपुर,लालबथानी,बलुआ दियारा,नाढ़ी दियारा,रामपुर सहित दर्जनों मौजा में किसान खरीफ व रबी सीजन के दौरान मकई उपजाते है। करीब 3500 से 4000 एकड़ से अधिक भूमि पर लोग खेती करते है।
किसान अपने अपने खेतों में मकई काटने में व्यस्त है। दिन रात थ्रेसिंग का काम चल रहा है। किसान के पास अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम नहीं रहने से मजबूरन व्यापारी के हाथों औने-पौने दाम में बेच देता है।
परिवार बड़ा होने की वजह से घर में जगह नहीं है जहां किसान सुरक्षित कुछ माह के लिए रख सके। व्यापारी खेत से ही मक्का क्रय कर वाहन में लोड करके चला जाता है। यहां से मक्का बिहार के पीरपैंती रैक प्वाइंट और कोलकाता चला जाता है।
क्या है एमएसपी
किसान को जब फसल तैयार हो जाता है तो बाजार में अनाज का भाव गिर जाता है। किसान को ऐसे स्थिति में अधिक क्षति का सामना करना पड़ता है। केन्द्र सरकार किसान को ऐसे जोखिम से बचाने के लिए एमएसपी लागू कर उचित दाम देती है और खुद खरीदती है। जिससे किसान को घाटा न सहना पड़े।
किसान बड़ी मेहनत से खेती बाड़ी करता है और बेचने का समय आता तो बाजार गिर जाता है वही तीन से चार माह बाद बाजार में दर बढ़ने के साथ किसी भी अनाज का दाम मिलने लगता है। देश के चार राज्य है जहां मक्का पर एमएसपी लागू है।
मध्य प्रदेश मक्का उत्पादान में अग्रणी राज्य है। केन्द्र द्वारा घोषित एमएसपी पर राज्य की मंडियों में खरीद की सुविधा दी गई है। कर्नाटक में भी मक्का अधिक होता है जहां एमएसपी का लाभ किसान को मिलता है। उत्तर प्रदेश में भी कुछ जिला में एमएसपी लागू कर लाभ दिया जाता है। बिहार सरकार सीमांचल जिसमें पूर्णिया, कटिहार में मक्का का बड़ा केद्र है यहां के किसान को लाभ दिया जाता है।
किसानों के बोल
किसान की हित की बात की जाती है लेकिन हम किसानों के साथ झारखंड सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। चार राज्यों में मक्का पर एसएसपी का लाभ दिया जाता है। जिस जिला में उत्पादन हो रहा वहां के किसान को लाभ देना चाहिए। राज्य को लागू करना है केन्द्र सरकार राशि देने के लिए तैयार है। इससे किसान को लाभ मिलता।-सुनील यादव, किसान, महादेवगंज
मिर्जाचौकी से लेकर राजमहल तक गंगा किनारे रबी व खरीफ के सीजन में मक्का का उपज अधिक होता है। खेती करने में जितना मेहनत,खर्च लगता है उसका कीमत नहीं निकलता है। आज के दिन परिवार बड़ा हो गया है। रहने में परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में उपज अनाज को कहां रखा जाए। यदि जिला प्रशासन हम किसानों के लिए दियारा क्षेत्र में गोदाम बना दे व कम शुल्क पर हमें अपना अनाज को रखने का आदेश जारी करे तो किसान को लाभ मिलेगा। तीन से चार माह में अच्छी कीमत बाजार में मिल सकेगी और बिचौलिया से मुक्ति मिलेगी।-संतोष यादव, किसान
केन्द्र सरकार हर साल एमएसपी का दर निर्धारित करती है। राज्य सरकार के उपर निर्भर करता है कि लागू करना या ना करना। यदि लागू कर धान की तरह मक्का भी लैम्पस,पैक्स से खरीदारी करे तो किसान खुद जाकर सरकार को देगी। इसके एवज में किसान को प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल जाता। इससे बिचौलिया से मुक्ति मिल जाता। राज्य सरकार को किसान के प्रति मक्का फसल के लिए विजन नहीं बना पायी है। जिससे यहां के किसान गरीब है। राज्य सरकार इस दिशा में विचार करना चाहिए।-संजय कुमार सिंह, किसान


