‘हिमाचल सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं पर एक और टैक्स का बोझ डाला’, विपक्ष ने साधा निशाना- जनविरोधी निर्णय वापस लें

 हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर जनता पर नया आर्थिक बोझ डाल दिया है, जिस कारण सबकी परेशानी बढ़ गई है। भाजपा वरिष्ठ प्रवक्ता एवं विधायक त्रिलोक जम्वाल ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए यह आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं पर फ्यूल चार्ज के रूप में एक और टैक्स लागू कर दिया है, जो पूरी तरह जनविरोधी निर्णय है।

त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के 28 लाख परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की गारंटी दी थी। यह कांग्रेस की दस प्रमुख गारंटियों में से एक थी, लेकिन सत्ता में आते ही सरकार ने अपने वादों से मुंह मोड़ लिया।

मुफ्त बिजली देने के बजाय सरकार ने सबसे पहले बिजली पर दी जा रही सब्सिडी समाप्त कर दी और इसके बाद लगातार बिजली उपभोक्ताओं पर नए-नए शुल्क और टैक्स थोपे जा रहे हैं।

मुफ्त बिजली के लाभ भी प्रभावित किया

पहले सरकार ने बिजली मीटरों को क्लब करने और केवाईसी की प्रक्रिया लागू कर उन उपभोक्ताओं को मिलने वाले 125 यूनिट मुफ्त बिजली के लाभ को प्रभावित किया। इसके बाद बिजली बिलों में मिल्क सेस लगाया गया, फिर पर्यावरण शुल्क जोड़ा गया और स्वच्छता शुल्क भी बिजली बिल में शामिल कर दिया गया।

अतिरिक्त बोझ जनता पर डाल दिया

अब सरकार ने फ्यूल चार्ज के रूप में एक और अतिरिक्त बोझ जनता पर डाल दिया है। जम्वाल ने कहा कि 30 मई से लागू किए गए इस नए फ्यूल चार्ज के कारण 200 यूनिट बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ता को भी अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार हर दिन जनता पर नए टैक्स लगाने का कार्य कर रही है। एक ओर प्रदेश में संस्थानों को बंद किया जा रहा है और दूसरी ओर आम लोगों की जेब पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है।

28 लाख बिजली उपभोक्ता प्रभावित

कांग्रेस सरकार के निर्णयों से प्रदेश के लगभग 28 लाख बिजली उपभोक्ता प्रभावित होंगे। चुनावी वादों में राहत देने की बात करने वाली सरकार आज राहत के बजाय जनता से अतिरिक्त वसूली कर रही है, जिससे आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। प्रदेश हित और जनता के हित को ध्यान में रखते हुए बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए फ्यूल चार्ज सहित अन्य अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा की जाए।

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