झज्जर के 21 गांवों की सेमग्रस्त भूमि को मिलेगी नई जिंदगी, वर्ल्ड बैंक की मदद से 29 करोड़ की परियोजना शुरू

 जिले के 21 गांवों में वर्षों से सेम (जलभराव व लवणीयता) की समस्या से प्रभावित किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर है। सेमग्रस्त भूमि को दोबारा कृषि योग्य बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक की सहायता से करीब 29 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिली है।

इस योजना के तहत 24,900 एकड़ भूमि से खारा पानी निकालकर उसे ड्रेनों में छोड़ा जाएगा, जिससे लंबे समय से बंजर होती जा रही जमीन पर फिर से फसलें लहलहा सकेंगी। भूमि संरक्षण विभाग ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है और अगले वर्ष अप्रैल से विभिन्न गांवों में कार्य शुरू होने की संभावना है।

315 सोलर वर्टिकल ट्यूबवेल लगाए जाएंगे

परियोजना के तहत प्रभावित क्षेत्रों में 315 सोलर संचालित वर्टिकल ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इन ट्यूबवेलों के माध्यम से जमीन के नीचे जमा खारा पानी बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन बिछाकर इस पानी को नजदीकी ड्रेनों में छोड़ा जाएगा। सौर ऊर्जा से चलने वाले इन सिस्टमों से बिजली पर निर्भरता कम होगी और संचालन लागत भी घटेगी।

योजना का लाभ जिले के 21 गांवों के हजारों किसानों को मिलेगा। इन गांवों में लंबे समय से भूजल स्तर ऊपर आने और जमीन में लवणीयता बढ़ने के कारण खेती प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर किसान मजबूरन भूमि को खाली छोड़ने लगे थे।

परियोजना पूरी होने के बाद इन क्षेत्रों में गेहूं, सरसों, बाजरा और अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इन गांवों में खातीवास, धौड़, तलाव, बाकरा, डीघल, लकड़िया, धांधलान, छारा, मातन, शेरिया, गोच्छी, बिसहान, मदाना, ढराना, देशलपुर, मांगावास, चिमनी, इश्लामगढ़, फोर्टपूरा, तामसपुरा, बिरड़ गांवों की भूमि शामिल हैं।

टेंडर प्रक्रिया शुरू, अप्रैल से धरातल पर दिखेगा काम

भूमि संरक्षण विभाग ने परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद व फसल कटाई के बाद अगले वर्ष अप्रैल से कार्य शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि निर्धारित समय में सभी गांवों में कार्य पूरा किया जा सके।

भूमि संरक्षण विभाग के सहायक मजोज यादव का कहना है कि सेमग्रस्त भूमि को पुनर्जीवित करने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही भूजल प्रबंधन और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। जिले में लगभग 24,900 एकड़ भूमि के पुनः खेती योग्य बनने से कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और हजारों परिवारों की आजीविका को स्थायी आधार प्राप्त होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *