गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा के आपस में आन लाइन कनेक्ट न होने की वजह से वाहन चालकों से ज्यादा टोल वसूला जा रहा है। इसे लेकर रोजाना वाहन चालकों और टोल प्लाजा कर्मियों के बीच विवाद हो रहा है।
जागरूक वाहन चालक अपनी यात्रा की दूरी के हिसाब से निर्धारित टोल देना चाहते हैं, लेकिन टोल प्लाजा कर्मी वाहन चालकों पर दबाव बनाकर ज्यादा राशि वसूल रहे हैं। अगर दोनों एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा आनलाइन कनेक्ट हों तो वाहन चालक जितनी दूरी दोनों एक्सप्रेसवे पर तय करेगा उतनी ही राशि टोल टैक्स के रूप में देनी पड़ेगी।
फर्रूखाबाद निवासी दिलीप सिंह सप्ताह में दो से तीन बार अपनी कार से लखनऊ आते हैं। फरुर्खाबाद से सरमाझला इंट्री प्वाइंट से वह गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ते हैं और गौरायाकला पर गंगा एक्सप्रेसवे को छोड़कर वह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर प्रवेश कर जाते हैं। सरमाझला से गौरायाकला की दूरी 96 किलोमीटर है।
इस दूरी के लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर उनसे 315 रुपये का टोल वसूला जाता है, जबकि 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से यह टोल करीब 245 रुपये होना चाहिए। यानी उनसे 70 रुपये अतिरिक्त वसूले जाते हैं।
इसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर गौरायाकला से प्रवेश कर एलप प्लाजा के पास से बाहर निकलने पर उनसे 90 रुपये की बजाय 120 रुपये या आगरा से लखनऊ का टोल मांगा जाता है। इसकी वजह सिर्फ यह है कि एलप टोल प्लाजा के कर्मी के पास संबंधित वाहन कहां से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करता है इसकी सूचना ही नहीं होती है।
इस बारे में दिलीप सिंह बताते हैं कि एलप टोल प्लाजा के सिस्टम में संबंधित वाहन कहां से एक्सप्रेसवे पर प्रवेश किया इसकी जानकारी नहीं होती है। अगर दोनों एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा आपस में कनेक्ट हो जाएं तो वाहन चालकों की यह समस्या समाप्त हो जाएगी।
साथ ही अधिक टोल की वसूली भी नहीं होगी। इस बाबत उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी एचपी शाही का कहना है कि उनके संज्ञान में पहले यह मामला नहीं था। उन्होंने कहा कि वह मामले की जांच कराएंगे।


